Thursday, 10 May 2018

नैतिक मूल्यों का जीवन में महत्व ब्रह्मकुमार भगवान् भाई , तनाव मुक्त जीवन











सुपौल (बिहार )---में मिलन मेरेज पेलेस में तनाव मुक्त  जीवन  पर कार्यक्रम 
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र  (सुपौल बिहार )
स्थान ---मिलन मेरेज पेलेस में 
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू 
विषय –- तनाव मुक्त  जीवन   
मुख्य अतिथि ---
जिला कलेक्टर  ---श्री वैद्यनाथ यादव 
व्यापारी संघ के अध्यक्ष --अमर कुमार चोधरी 
व्यापारी संघ के उप -अध्यक्ष --उमेश जैन 
किशोर अग्रवाल  
बी के शालिनी बहन प्रभारी स्थानीय ब्रह्माकुमारी सुपौल (बिहार )
बी के जयमाला किशनपुर उप केंद्र प्रभारी 
बी के सुनीति राजयोग शिक्षिका सुपौल 
बी के जयमाला बहन ---प्रभारी किशनपुर उप सेवाकेंद्र 
बी के पुरोषोत्तम भाई माउंट आबू 
कार्यक्रम की शुरवात दीप प्रज्वलन से की गयी 

इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि मन में चलने वाले लगातार नकारात्मक विचार वर्तमान में अनेक समस्याओं का कारण बनते है। मन के नकारात्मक विचारों से ही तनाव उत्पन्न होता है। तनाव से मुक्ति के लिए सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सकारात्मक रहने से हर समस्या का समाधान निकलता है। बुराई में भी अच्छाई देखने का प्रयास करने से मन पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि मन में चलने वाले विचारों से ही स्मृति, वृत्ति, भावना, दृष्टिकोण और व्यवहार बनता है। अगर मन के विचार नकारात्मक होंगे तो स्मृति, दृष्टि, वृत्ति, भावना, व्यवहार भी नकारात्मक बनता है। ऐसा होने से मन में तनाव पैदा होता है। मन के विचार ही वास्तव में बीज है। भगवान भाई ने सकारात्मक विचारों को तनाव मुक्ति की संजीवनी बूटी बताया। उन्होंने बताया कि स्वयं की रक्षा करने वाला ही देश की रक्षा कर सकता है। सकारात्मक विचारों का स्त्रोत आध्यात्मिकता है। उन्होंने बताया वर्तमान समय स्वयं को सकारात्मक बनाने की आवश्यकता है। सकारात्मक सोचने वाला हर परिस्थिति को स्वीकार कर विजयी बन सकता है। स्थानीय राजयोग सेवा केन्द्र की संचालिका प्रेमलता ने कहा राजयोग के नित्य अभ्यास से ही हमारा मनोबल और आत्मबल बढ़ता है। 
 जिला कलेक्टर  ---श्री वैद्यनाथ यादव  ने कहा कि  वर्तमान की परिवेश में हर एक को किसी न किसी बात का तनाव जरूर होता है। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज द्वारा बताई गई बातों को अमल में लाकर तनाव से मुक्त रहने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि अपनी सकारात्मक सोच बनाकर जीवन को सफलता दिलाते है। इसीलिए अपने सोच को सदा सकारात्मक रखें। भगवान भाई ने मनोबल, आत्मबल बढ़ाने के लिए राज योग भी कराया 
बी के शालिनी बहन  ने ॐ कि ध्वनी कराइ और ॐ ध्वनी का महत्व भी बताया उन्होंने ने बताया  हम कोन ,परमात्मा कोन राजयोग का महत्व भी बताया 
व्यापारी संघ के अध्यक्ष --अमर कुमार चोधरी जी ने ईश्वरीय कार्य में सहयोगी बनने की बात कही
बी के जयमाला ने सस्था का परिचय दिया 


सुपौल (बिहार )---बाबुजन बालिका विद्यालय में नैतिक मूल्यों का जीवन महत्त्व पर कार्यक्रम 
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र सुपौल (बिहार )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू 
विषय –- नैतिक मूल्यों का जीवन में महत्व  
प्रिंसिपल ---नीतू सिंह   
बी के शालिनी बहन प्रभारी स्थानीय ब्रह्माकुमारी सुपौल (बिहार )
बी के पुरोषोत्तम भाई माउंट आबू 
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे 
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया
बी के भगवान् भाई ने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
बी के शालिनी बहन जी  ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। 
प्रिंसिपल ---नीतू सिंह  जी  ने भी अपना उद्बोदन दिया और कहा की वर्तमान में बच्चो को नैतिक मूल्यों की आवश्यकता है नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।

कुछ बच्चो ने भी अपना अनुभव सुनाया 

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