Wednesday, 17 January 2018

भगवानपूर (बिहार )—नवनिर्मित शांति शक्ति सरोवर वरिसपुर भगवानपूर (बिहार )में स्नेह मिलन

भगवानपूर (बिहार  )—नवनिर्मित शांति शक्ति सरोवर वरिसपुर भगवानपूर (बिहार  )में स्नेह मिलन कार्यकर्म 
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-तनाव मुक्ति 
सीनियर राजयोगी बी के प्रफुल भाई 
बी के ज्योतिबहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर(बिहार )
बी के वीरेंद्र   भाई इंजनियर शांतिवन 
बी के अमन भाई  
बी के विवेकानंद भाई   
आस पास के गांव के लोगो ने भाग लिया 
इस अवसर पर माउंट आबू के राजयोगी बी के भगवान् भाई ने कहा कि वर्तमान समय जितनी भी समस्या हैं उन सबका कारण है नकारात्मक सोच। नकारात्मक सोच से तनाव बढ़ता है। तनाव मुक्त बनने के लिए सकारात्मक विचार संजीवनी बूटी है। सकारात्मक विचार से ही मुक्ति संभव है।उन्होंने कहा कि 19वीं सदी तर्क की थी, 20वीं सदी प्रगति की रही और 21वीं सदी तनाव पूर्ण होगी। ऐसे तनावपूर्ण परिस्थितियों में तनाव से मुक्त होने सकारात्मक विचारों की आवश्यकता है।उन्होंने बताया कि मन में लगातार चलने वाले नकारात्मक विचारों से दिमाग में विभिन्न प्रकार के रासायनिक पदार्थ उतरकर शरीर में आ जाते हैं। इनसे अनेक बीमारियां होती हैं। मन के नकारात्मक विचारों से मनोबल, आत्मबल कमजोर बन जाता है।भगवान भाई ने कहा कि जहां तनाव है वहां अनेक समस्याएं बढ़ जाती हैं। तनाव के कारण आपसी मतभेद, टकराव बढ़ जाते हैं। जहां तनाव है वहां मानसिक अशांति के वश होकर मनुष्य व्यसन, नशा, डिप्रेशन के वश हो जाता है। उन्होंने बताया कि मन चलने वाले नकारात्मक विचारों के कारण ही मन में घृण, नफरत, बैर, विरोध, आवेश और क्रोध उत्पन्न होता है।

भगवानपूर (बिहार )—बडारूप गांव में शिव मंदिर में तनाव मुक्ति

भगवानपूर (बिहार  )—बडारूप गांव में  शिव मंदिर में तनाव मुक्ति और परमात्मा का परिचय विषय पर  प्रोग्राम  
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-तनाव मुक्ति
वरिष्ठ नागरिक ---अनिल यादव     बी के ज्योति बहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  ) बी के सावित्री बहन 
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया     
इस अवसर पर बी के भगवान् भाई ने कहा कि  जीवन में दो प्रकार के चिंतन होते हैं जिनमें सकारात्मक और नकारात्मक चिंतन शामिल हैं। इनमें से मनुष्य को केवल सकारात्मक चिंतन करने की आवश्यकता होती है तथा इसी से मनुष्य खुशहाल जीवन जी सकता है। उन्होंने कहा कि हमारे विचार शुद्ध, स्पष्ट, आशावादी और परोपकारी होने चाहिए तथा यही जीवन का मूलमंत्र है। इस अवसर पर बहन नवीना ने राजयोग के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि राजयोग का मतलब शारीरिक तथा मानसिक रूप से स्वस्थ रहना है। उन्होंने कहा कि जीवन का लक्ष्य आत्मा को परमपिता परमात्मा से जोडऩा है। लेकिन आज हमारे अंदर शांति, सहनशीलता तथा भाईचारे की भावना बिल्कुल नहीं है। आज हम खुशी को घर से बाहर ढूंढने का प्रयास करते हैं जो सही नहीं है। इसलिए हमें सबसे पहले अपने अंदर झांककर अपने आप को जानना चाहिए।
भगवान् भाई ने कहा कि  तनाव से मुक्त जीवन एक कल्पना मात्र है, फिर भी एक प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए बहुत कुछ हद तक इसका होना अत्यन्त आवश्यक है। जब तनाव एक सीमा पार कर जाता है, तब हमारा मानसिक सन्तुलन बिगड़ सकता है और इसका असर शरीर पर भी पड़ता है। मनोचिकित्सकों के अनुसार, कई प्रकार के मनोरोग जैसे-चिन्ता, डिप्रेशन, हिस्टीरिया, पैनिक, डिसऑर्डर आदि के पीछे मुख्य कारण मानसिक तनाव है।

उन्होंने बताया कि निरन्तर तनावग्रस्त बने रहना जीवन में हानिकारक है। चूँकि जीवन-उद्देश्य आपके सामने है, तनावग्रस्त से दूर रहना ही आपके लिए श्रेष्ठतर होगा। अतः आप तनाव के बहुत से कारकों से बचें, जो आप आसानी से कर सकते हैं और साथ में ये भी।

भगवानपूर (बिहार )—लक्ष्मी नारायण सरस्वती विद्या मंदिर में नैतिक शिक्षा


भगवानपूर (बिहार  )—लक्ष्मी नारायण सरस्वती विद्या मंदिर  में नैतिक शिक्षा विषय पर  प्रोग्राम  
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा 
प्रिंसिपल  ---मनोज कुमार 
            बी के ज्योति बहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
            बी के वीरेंद्र   भाई इंजनियर शांतिवन 
            बी के अमन भाई  
            बी के विवेकानंद भाई  
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया     
 राजयोगी ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है क्योंकि नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है। सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है। भगवान् भाई ने खा की भारत की नैतिकता इतनी ऊँची थी कि सारा संसार अपने चरित्र के अनुसार शिक्षा प्राप्त करे।ऐसी घोषणा यहाँ की जाती थी। नैतिकता के अंग हैं – सच बोलना, चोरी न करना, अहिंसा, दूसरों के प्रति उदारता, शिष्टता, विनम्रता, सुशीलता आदि। परन्तु आज ये शिक्षा ना तो बालक के माता-पिता, जिन्हें बालक की प्रथम पाठशाला कहा जाता है, ना ही विद्यालय दे पा रहा है। नैतिक शिक्षा के अभाव के कारण ही आज जगत में अनुशासनहीनता का बोल-बाला है। आज का छात्र कहाँ जानता है, बड़ों का आदर-सत्कार, छोटों से शिष्ठता-प्यार, स्त्री जाति की सुरक्षा-सम्मान सत्कार। रही-सही कसर पूरी कर देता है हमारा फिल्मजगत और टेलिविजन प्रसारण। जो अश्लीलता की हर हदें पार कर चुका है और उसका मूल्य चुकाना पड़ता है समाज को, क्योंकि मनुष्य का स्वभाव है अनुकरण करना। वह अनुकरण से ही सीखता है।बच्चों के सर्वागीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से ही बच्चों का सर्वागीण विकास संभव है।उन्होंने  कहा कि शैक्षिक जगत में विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समस्याओं का मूल कारण है। विद्यार्थियों का मूल्यांकन आचरण, अनुसरण, लेखन, व्यावहारिक ज्ञान एवं अन्य की तरफ प्रेरणा देने की आवश्यकता है। ज्ञान की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जो शिक्षा विद्यार्थियों को अंधकार से प्रकाश तथा असत्य से सत्य व बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाएं सच्ची शिक्षा है। समाज अमूर्त है और प्रेम, सदभावना, भाईचारा,नैतिकता एवं मानवीय मूल्यों से ही संचालित होता है। एक प्रगतिशील एवं श्रेष्ठ समाज इन्हीं मूल्यों से परिभाषित होता है। शैक्षिक जगत से ही समाज के आधारभूत ढांचे का निर्माण होता है। राजयोगी ने कहा कि शिक्षा ऐसा बीज है जिससे जीवन फलदार वृक्ष बन जाता है। जब तक व्यवहारिक जीवन में सेवाभाव, परोपकार, धैर्य, त्याग, उदारता, नम्रता, सहनशीलता, सत्यता, पवित्रता आदि सदगुणी फल नही आते तब तक हमारी शिक्षा अधूरी है। व्यक्तिगत अच्छा व बुरा व्यक्ति अपने अंदर के गुणों से बनता है। गुणवान, चरित्रवान व्यक्ति सभी को प्रिय होता है।      बी के ज्योति बहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )ने कहा कि कुसंग, सिनेमा, व्यसन, फैशन से युवा भटकता है। चरित्र व गुणवान बच्चे देश व समाज की संपत्ति है। कार्यक्रम को प्रिंसिपल  ---मनोज कुमार  ने कहा  की यह ज्ञान कोई धर्म जाती नहीं बल्कि मानवता सिखाता है , महेश भाई ने भी  ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर ब्रह्मकुमारी सावित्री बहन बी के वीरेंद्र   भाई इंजनियर शांतिवन 
            बी के अमन भाई  
            बी के विवेकानंद भाई   और शिक्षक आदि का योगदान रहा।

मुजफ्फपुर (बिहार )— प्रीमियर ऐकेडमी में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )— प्रीमियर ऐकेडमी  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
स्थान ---स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र सुख शांति भवन  आमगोला रोड मुजफ्फपुर (बिहार  )
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री ब्रिजकिशोर  प्रसाद  
रानी बहन बिहार झारखण्ड  झोन प्रभारी
  बी के मनीषा माता जी मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के भास्कर   भाई  जी  मुजफ्फपुर (बिहार  )
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
भगवान भाई ने कहा कि नैतिक मूल्यों से बच्चे के सुंदर चरित्र का निर्माण होता है |
नैतिक मूल्यों के विकास से बच्चे में समाजीकरण की भावना का विकास होता है |गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा  भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं।नैतिक शिक्षा से नैतिकता आएगी | उन्होंने कहा नैतिक मूल्यों की कमी ही समाज के  हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों एवं उच्च आदर्शों से बच्चे का आत्मविश्वास व आत्मचेतना मजबूत होती है | उसके अंदर सच्चाई का बोलबाला होता है | उसमे समस्या के समाधान के लिए सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता होती है |
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। 
 भास्कर भाई ने मंच संचालन किया
 बी के मनीषा बहन ने ब्रह्माकुमारी सस्था का परिचय दिया 
बी के अर्चना माता जी
प्राचार्य श्री ब्रिजकिशोर  प्रसाद   दिया  
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
रानी बहन  सभी बच्चो को प्रसाद  और आशीर्वाद  दिया  प्रफुल भाई ने साहित्य वितरित किया 

मुजफ्फपुर (बिहार )—असिअन स्कूल में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—असिअन स्कूल  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री अनिल कुमार 
 SCHOOL DAYREKTR----RAM KUMAR 
  बी के पूनम माता जी मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के अमन   भाई  जी  मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के शोभाकांन्त  भाईऔर सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  

माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा बच्चो  के विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। हर मनुष्य को जीवन मूल्यों की रक्षा करना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा करने वाला अमर बन जाता है।
भगवान  भाई  कहा कि समाज में व्यक्ति दो चीजों से पहचाना जाता है | पहला ज्ञान और दूसरा उसका नैतिक व्यवहार | व्यक्ति के सर्वांगीण विकास के लिए यह दोनों ही अति आवश्यक है | अगर ज्ञान सफलता की चाबी है तो नैतिकता सफलता की सीढ़ी | एक के अभाव में दूसरें का पतन निश्चित है | नैतिकता के कारण ही विश्वास में दृढ़ता और समझ में प्रखरता आती है |
उन्होंने कहा की नैतिक शिक्षा  गुणों का विकास करती है | बच्चों को संस्कारों से जोड़ती है | उन्हें उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराती है | परिवार, समाज, समूह के नैतिक मूल्यों को स्वीकारना तथा सामाजिक रीति – रिवाजों, परम्पराओं व धर्मों का पालन करना सिखाती है  
भगवान  भाई ने कहा कि  नैतिक शिक्षा वह शिक्षा है जो हमें बड़ों का आदर करना, सुबह जल्दी उठाना, सत्य बोलना, चोरी न करना, माता – पिता के चरणस्पर्श करना तथा अपराधिक प्रवृतियों से दूर रहना सिखाती है उन्होंने  कहा कि बचपन से ही बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने से उन्हें भले – बुरे, उचित – अनुचित का ज्ञान हो जाता है | वह समझने लगता है कि कौन सा व्यवहार सामाजिक है और कौन सा व्यवहार असामाजिक | किन व्यवहारों को करने से समाज में प्रतिष्ठा, प्रंशसा एवं लोकप्रियता मिलती है और किससे नहीं |
प्रिंसिपल श्री अनिल कुमार जी ने कहा कि नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।
बी के पूनम ने ब्रह्माकुमारी विद्यालय का  दिया अंत में भगवान  भाई ने मेडिटेशन भी कराया 

मुजफ्फपुर (बिहार )—इंद्रप्रस्थ इंटरनॅशनल बोचहाँ स्कूल मुजफ्फपुर (बिहार ) में नैतिक शिक्षा


मुजफ्फपुर (बिहार  )—इंद्रप्रस्थ  इंटरनॅशनल बोचहाँ  स्कूल  मुजफ्फपुर (बिहार  ) में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री अनुपमा चौधरी   
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
बी के भगवान् भाई ने कहा कि भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते।उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।

भगवान् भाई ने कहा कि हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।
इस मोके पर बी के राजेंद्र भाई  ने कहा  के वर्तमान में बच्चो को अच्छे संस्कार कि आवश्यकता है उन्होंने बताया कि संस्कारित बच्चे देश कि सच्ची सम्पति है  प्रिंसिपल ने भी अपना सम्बोधन दिया 

मुजफ्फपुर (बिहार )—ए आर इंटरनॅशनल पब्लिक स्कूल फतेपुर चौक मुजफ्फपुर (बिहार ) में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—ए आर इंटरनॅशनल पब्लिक स्कूल फतेपुर चौक  मुजफ्फपुर (बिहार  ) में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री सुरेश कुमार  
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  

कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया  

भगवान भाई ने कहा कि गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा  भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं।नैतिक शिक्षा से नैतिकता आएगी | उन्होंने कहा नैतिक मूल्यों की कमी ही समाज के  हर समस्या का मूल कारण हैं।नैतिक मूल्यों से बच्चे के सुंदर चरित्र का निर्माण होता है |
नैतिक मूल्यों के विकास से बच्चे में समाजीकरण की भावना का विकास होता है | ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। 

मुजफ्फपुर (बिहार )—ओ बी सी कन्या आवासीय सीनियर सेकण्डरी विद्यालय खबड़ा, मुजफ्फपुर (बिहार ) नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—ओ  बी  सी कन्या आवासीय सीनियर सेकण्डरी विद्यालय खबड़ा, मुजफ्फपुर (बिहार  ) नैतिक शिक्षा  महत्व  विषय पर सेमिनार      
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा  महत्व 
सह शिक्षक ---श्री डॉ रघुनाथ उपाध्याय 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा बच्चो  के विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। हर मनुष्य को जीवन मूल्यों की रक्षा करना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा करने वाला अमर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के लिए जितना जरूरी किताबी ज्ञान है, उतना ही जरूरी नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। अत: शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाई के साथ ब'चों का मूल्यांकन, आचरण, अनुसरण, व्यावहारिक ज्ञान, लेखन एवं अन्य बातों की तरफ प्रेरणा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा ब'चों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही वास्तविक शिक्षा है। अपराध मुक्त समाज की स्थापना के लिए मानवीय मूल्यों, नैतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा वर्तमान के युवाओं को सशक्त व संस्कारित करना जरूरी है। आज का युवा कल का भावी समाज है। वर्तमान का सशक्त युवा भविष्य के समाज को सशक्त बना सकता है। वर्तमान समय कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा, इन्टरनेट व टीवी के माध्यम से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाएं तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे।
 बी के शोभाकांत जी ने भी अपना उद्बोधन भी दिया 
अंत में मेडिटेशन भी किया  
सह शिक्षक श्री डॉ रघुनाथ उपाध्याय जी ने भी अपना उद्बोधन दिया 

मुजफ्फपुर (बिहार )—किड्स कैंप इंटरनॅशनल बोचहाँ स्कूल मुजफ्फपुर (बिहार ) में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—किड्स कैंप  इंटरनॅशनल बोचहाँ  स्कूल  मुजफ्फपुर (बिहार  ) में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्रीमति चेताली दास    
बी के राजेंद्र भाई   
सह  शिक्षिका ---सिमा झा 
व्याख्याता ---अजित कुमार 
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे 
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया
भगवांन  भाई ने कहा नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।उन्होंने कहा की नैतिकता के अंग हैं – सच बोलना, चोरी न करना,अहिंसा, दूसरों के प्रति उदारता, शिष्टता, विनम्रता, सुशीलता आदि। परन्तु आज ये शिक्षा ना तो बालक के माता-पिता, जिन्हें बालक की प्रथम पाठशाला कहा जाता है, ना ही विद्यालय दे पा रहा है। नैतिक शिक्षा के अभाव के कारण ही आज जगत में अनुशासनहीनता का बोल-बाला है। आज का छात्र कहाँ जानता है, बड़ों का आदर-सत्कार, छोटों से शिष्ठता-प्यार, स्त्री जाति की सुरक्षा-सम्मान सत्कार। रही-सही कसर पूरी कर देता है
भगवान भाई ने कहा की नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है क्योंकि नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है। सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है। 
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
बी के राजेंद्र भाईजी ने भी अपना उद्बोधन दिया और कहा की   भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। 
प्राचार्य --श्रीमति चेताली दास  जी ने भी अपना उद्बोधन देते हुए कहा की नैतिक शिक्षा से ही छात्र-छात्राओं में सशक्तिकरण आ सकता है। उन्होंने आगे बताया कि नैतिकता के बिना जीवन अंधकार में हैं। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण अज्ञानता, सामाजिक, कुरीतियां व्यसन, नशा, व्यभिचार आदि के कारण समाज पतन की ओर जाता है। 

मुजफ्फपुर (बिहार )—चंद्रशील विद्यापीठ में नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण

मुजफ्फपुर (बिहार  )—चंद्रशील विद्यापीठ में नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा से चरित्र निर्माण 
प्राचार्य --श्री यू के  पोद्यार 
  बी के पूनम माता जी मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के कृष्णंनदन  भाई  जी  मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के शोभाकांन्त  भाईऔर सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  

माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा बच्चो  के विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। हर मनुष्य को जीवन मूल्यों की रक्षा करना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा करने वाला अमर बन जाता है।
भगवान  भाई  कहा कि नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के लिए जितना जरूरी किताबी ज्ञान है, उतना ही जरूरी नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है।  अपराध मुक्त समाज की स्थापना के लिए मानवीय मूल्यों, नैतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा वर्तमान के युवाओं को सशक्त व संस्कारित करना जरूरी है। आज का युवा कल का भावी समाज है। वर्तमान का सशक्त युवा भविष्य के समाज को सशक्त बना सकता है। युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाएं तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे।उन्होंने कहा कि नैतिकता के अंग हैं – सच बोलना, चोरी न करना,अहिंसा, दूसरों के प्रति उदारता, शिष्टता, विनम्रता, सुशीलता आदि। नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है। सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है।
  बी के पूनम माता जी ने ब्रह्माकुमारी सस्था का विस्तार   दिया 
 बी के  शोभाकांन्त  भाईजी ने भी अपना उद्बोधन भी दिया 
अंत में मेडिटेशन भी किया 
 प्रिंसिपल श्री यू के  पोद्यार ने कहा की  शिक्षा मनुष्य के सम्यक् विकास के लिए उसके विभिन्न ज्ञान तंतुओ को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा लोगों में आत्मसात करने, ग्रहण करने, रचनात्मक कार्य करने, दूसरों की सहायता करने और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में पूर्ण सहयोग देने की भावना का विकास होता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को परिपक्व बनाना है ।

मुजफ्फपुर (बिहार )—चैपमेन राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नैतिक शिक्षा

 मुजफ्फपुर (बिहार  )—चैपमेन राजकीय बालिका उच्चतर माध्यमिक विद्यालय  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --वास्तव सरोज कुमारी 
सह  प्राचार्य--मृत्युंजय कुमार
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
भगवान भाई ने कहा सुखी जीवन के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।
हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध
करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर
सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

मुजफ्फपुर (बिहार )—डी ए व्ही पब्लिक स्कूल में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—डी ए व्ही पब्लिक स्कूल  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री  एम के वर्मा 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाईऔर सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  

कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया 
बी के भगवान् भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा का अर्थ उस शिक्षा से है जो बच्चे में नैतिकता के गुणों का विकास करती है | बच्चों को संस्कारों से जोड़ती है | उन्हें उनके कर्तव्यों का ज्ञान कराती है | परिवार, समाज, समूह के नैतिक मूल्यों को स्वीकारना तथा सामाजिक रीति – रिवाजों, परम्पराओं व धर्मों का पालन करना सिखाती है |

भगवान् भाई ने कहा कि नैतिक शिक्षा का अर्थ और मूल्य जानने के बाद आप यह समझ ही गए होंगे कि नैतिक शिक्षा का हमारे जीवन में क्या महत्व है और यह कितना आवश्यक है | जिन बच्चों को बचपन से ही सच बोलना, सहयोग करना, दया करना, निष्पक्षता, आज्ञापालन, राष्ट्रीयता, समयबद्धता, सहिष्णुता, करुणा, आदि मानवीय गुणों को सिखाते है उन्हीं बच्चों में बाद में चलकर ये ही गुण पुष्पित, पल्लवित, व विकसित होकर चरित्र निर्माण में सहायक होते है |
उन्होंने ने बताया की बचपन से ही बच्चों को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने से उन्हें भले – बुरे, उचित – अनुचित का ज्ञान हो जाता है | वह समझने लगता है कि कौन सा व्यवहार सामाजिक है और कौन सा व्यवहार असामाजिक | किन व्यवहारों को करने से समाज में प्रतिष्ठा, प्रंशसा एवं लोकप्रियता मिलती है और किससे नहीं |
प्राचार्य श्री  एम के वर्मा  ने कहा कि नैतिक मूल्यों से ही  समस्या का  मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।
इस मोके पर  बी के राजेंद्र भाई  ने कहा  के वर्तमान में बच्चो को अच्छे संस्कार कि आवश्यकता है उन्होंने बताया कि संस्कारित बच्चे देश कि सच्ची सम्पति है 

मुजफ्फपुर (बिहार )—डी ए व्ही पब्लिक स्कूल बखरी में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—डी ए व्ही पब्लिक स्कूल बखरी मुजफ्फपुर (बिहार  ) में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
सह प्राचार्य --श्री  बी के सिंह 
एस एस मिश्रा 
के के सिंह 
संजय कुमार झा 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाईऔर सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया 
इस अवसर पर भगवान् भाई ने कहा कि  भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते उन्होंने  कहा कि  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।
भगवान् भाई ने कहा कि हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है।उनहोंने कहा  कि  मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते।

मुजफ्फपुर (बिहार )—डोल्पिन पब्लिक स्कूल मुजफ्फपुर (बिहार ) में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—डोल्पिन  पब्लिक स्कूल  मुजफ्फपुर (बिहार  ) में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
डायरेक्टर  --श्री  धर्मवीर कुमार 
सह  शिक्षक सत्यप्रकाश मिश्रा 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाईऔर सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया 

बी के भगवान् भाई कहा कि शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते। उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।
हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध
करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

मुजफ्फपुर (बिहार )—दून पब्लिक स्कूल में नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—दून पब्लिक स्कूल  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
प्राचार्य --श्री अनिल कुमार मिश्र  
  बी के राजेंद्र भाई  जी मुजफ्फपुर (बिहार  )
बी के शोभाकांत भाई  जी  मुजफ्फपुर (बिहार  )
 सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
ब्रह्माकुमारी माउंट आबू के बी के भगवान् भाई ने कहा सुखी जीवन के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। भौतिक शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते।उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।
उन्होंने कहा  की हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का
मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

मुजफ्फपुर (बिहार )—प्राथमिक शिक्षक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय चंदवार मुजफ्फपुर (बिहार ) आदर्श शिक्षक

मुजफ्फपुर (बिहार  )—प्राथमिक शिक्षक शिक्षा प्रशिक्षण महाविद्यालय चंदवार  मुजफ्फपुर (बिहार  ) आदर्श शिक्षक मोटिवेशनल टीचर विषय पर सेमिनार      
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-आदर्श शिक्षक मोटिवेशनल टीचर 
उप प्रिंसिपल  --  रमेश प्रसाद सिंह 
व्याख्याता ---राजकुमारी प्रसाद 
व्याख्याता किरण प्रसाद 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
कुछ शिक्षकों ने अनुभव भी सुनाया 
बी के भगवान् भाई ने कहा कि बिगड़ती परिस्थिति को देखते हुए समाज को सुधारने की बहुत आवश्यकता हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है। धारणाओं से वाणी, कर्म, व्यवहार और व्यक्तित्व में निखार आ जाता है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी अगर बच्चे बिग$ड रहे हैं  उसका मतलब मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। उन्होंने कहा कि शिक्षक के अंदर के जो संस्कार है उनका विद्यार्थी अनुकरण करते हे। । शिक्षकेां को केवल पाठ प$ढाने वाला शिक्षक बनना है। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है। शिक्षा मेें भौतिक सुधार तो है लेकिन नैतिकता का हृास होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि अपने जीवन की धारणाओं के आधार से नैतिक पाठ भी आवश्यक पढाये।  भगवान भाई ने कहा कि शिक्षकों के हाव भाव उठना, बोलना, चलना, व्यवहार करना इन बातो का असर भी बच्चों के जीवन में प$ढता है। उन्होंने कहा कि जब समाज को शिक्षित करने  व शिखा देने के स्वरूप को बदलने की आवश्यकता है, स्वयं के आचारण से शिक्षा देने की आवश्यकता है।
स्थानीय बह्मकुमारी के बी के राजेंद्र  भाईने कहा कि  एक दीपक से पूरा कमरा प्रकाशमान होता है तो क्या पूरे जिले को मूल्य निष्ठ शिक्षा से प्रकाशित हम सब मिलकर नहीं कर सकते हैं? अब आवश्यकता है सेवाभाव की। उन्होंने कहा कि आचरण की शिक्षा जबान में भी तेज होती है।  उप प्रिंसिपल  --  रमेश प्रसाद सिंह  जी ने  कहा कि परिवर्तन करने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है, शिक्षकों को स्वयं को आचरण पर ध्यान देने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान के साथ साथ तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। उन्हेांने बह्मकुमारी द्वारा चलाये जा रहे इस अभियान की सराहना की 

मुजफ्फपुर (बिहार )—प्रिंयका गर्ल्स हॉस्टल छाता चौक मुजफ्फपुर (बिहार ) नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—प्रिंयका गर्ल्स हॉस्टल छाता  चौक  मुजफ्फपुर (बिहार  ) नैतिक शिक्षा  महत्व  विषय पर सेमिनार      
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा  महत्व 
प्रिंसिपल  -- श्रीमती प्रिंयका मिश्रा 
सह शिक्षक ---श्री अजय मिश्रा 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे 
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया 
माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा बच्चो  के विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। हर मनुष्य को जीवन मूल्यों की रक्षा करना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा करने वाला अमर बन जाता है।
उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए जितना जरूरी किताबी ज्ञान है, उतना ही जरूरी नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। अत: शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाई के साथ ब'चों का मूल्यांकन, आचरण, अनुसरण, व्यावहारिक ज्ञान, लेखन एवं अन्य बातों की तरफ प्रेरणा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा ब'चों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही वास्तविक शिक्षा है। अपराध मुक्त समाज की स्थापना के लिए मानवीय मूल्यों, नैतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा वर्तमान के युवाओं को सशक्त व संस्कारित करना जरूरी है। आज का युवा कल का भावी समाज है। वर्तमान का सशक्त युवा भविष्य के समाज को सशक्त बना सकता है। वर्तमान समय कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा, इन्टरनेट व टीवी के माध्यम से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाएं तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे।
सीनियर राजयोगी बी के राजेंद्र  जी ने भी अपना उद्बोधन भी दिया 
अंत में मेडिटेशन भी किया 
 प्रिंसिपल  श्रीमती प्रिंयका मिश्रा ने कहा की  शिक्षा मनुष्य के सम्यक् विकास के लिए उसके विभिन्न ज्ञान तंतुओ को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा लोगों में आत्मसात करने, ग्रहण करने, रचनात्मक कार्य करने, दूसरों की सहायता करने और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में पूर्ण सहयोग देने की भावना का विकास होता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को परिपक्व बनाना है ।

मुजफ्फपुर (बिहार )—संत जोसफ सीनियर सेकंडरी स्कूल मैदान चौक मुजफ्फपुर (बिहार ) नैतिक शिक्षा

मुजफ्फपुर (बिहार  )—संत जोसफ सीनियर सेकंडरी स्कूल मैदान चौक मुजफ्फपुर (बिहार  ) नैतिक शिक्षा  महत्व  विषय पर सेमिनार      
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा  महत्व 
प्रिंसिपल  -- राधाकांत प्रसाद 
सह शिक्षक ---श्री रमेश झा 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे 
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया
भगवांन  भाई ने कहा नैतिक शिक्षा किसी भी व्यक्ति के विकास में उतना ही आवश्यक है जितना कि स्कूली शिक्षा। नैतिक शिक्षा से ही हम अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते है जो आगे चलकर कठिन परिस्थितियों का सामना करने का आत्मविवेक व आत्मबल प्रदान करता है।उन्होंने कहा की नैतिकता के अंग हैं – सच बोलना, चोरी न करना,अहिंसा, दूसरों के प्रति उदारता, शिष्टता, विनम्रता, सुशीलता आदि। परन्तु आज ये शिक्षा ना तो बालक के माता-पिता, जिन्हें बालक की प्रथम पाठशाला कहा जाता है, ना ही विद्यालय दे पा रहा है। नैतिक शिक्षा के अभाव के कारण ही आज जगत में अनुशासनहीनता का बोल-बाला है। आज का छात्र कहाँ जानता है, बड़ों का आदर-सत्कार, छोटों से शिष्ठता-प्यार, स्त्री जाति की सुरक्षा-सम्मान सत्कार। रही-सही कसर पूरी कर देता है
भगवान भाई ने कहा की नैतिक शिक्षा ही मानव को ‘मानव’ बनाती है क्योंकि नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनीय बनता है। सारी दुनिया में नैतिकता अर्थात सच्चरित्रता के बल पर ही धन-दौलत, सुख और वैभव की नींव खड़ी है। 
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
प्रिंसिपल राधाकांत प्रसाद जी ने भी अपना उद्बोधन दिया और कहा की   भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। 
अतिथि ---प्रिंसिपल  श्री यशपाल सिंह  जी ने भी अपना उद्बोधन देते हुए कहा की नैतिक शिक्षा से ही छात्र-छात्राओं में सशक्तिकरण आ सकता है। उन्होंने आगे बताया कि नैतिकता के बिना जीवन अंधकार में हैं। नैतिक मूल्यों की कमी के कारण अज्ञानता, सामाजिक, कुरीतियां व्यसन, नशा, व्यभिचार आदि के कारण समाज पतन की ओर जाता है। 

मुजफ्फपुर (बिहार )—हनुमान नगर में तनाव मुक्ति


मुजफ्फपुर (बिहार  )—हनुमान नगर में तनाव मुक्ति पर प्रोग्राम   
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-तनाव मुक्ति 
अतिथि --- ऋषिकेश शर्मा एस डी ओ मधुबनी 
              कविता गोमनका बजाज मोटर ओनर 
               सुरेश महेता मैनेजर 
               जनकराज जी एम् अशोक ब्रांड डीलर शीप 
             
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई 
बी के भगवान भाई ने कहा कि बदलने से विपरीत परिस्थिति भी सहज दिखने लगती है। अपनी समस्या को समाप्त करने एवं सफल जीवन जीने के लिए विचारों को सकारात्मक बनाने की बहुत आवश्यकता है। 
उन्होंने कहा कि समस्याओं का कारण ढूढने  की बजाए निवारण ढंूढ़े।
उन्होंने कहा कि समस्या का चिंतन करने से तनाव की उत्पत्ति होती है। मन के विचारों का प्रभाव वातावरण पेड़-पौधों तथा दूसरों व स्वयं पर पड़ता है।यदि हमारे विचार सकारात्म है तो उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि जीवन को रोगमुक्त,दीर्घायु, शांत व सफल बनाने के लिएहमें सबसे पहले विचारों को सकारात्मक बनाना चाहिए। राजयोगी भगवान भाई ने कहा कि सकारात्मक विचार से समस्या समाधान में बदल जाती है। एक दूसरों के प्रति सकारातमक विचार रखने से आपसीभाई चारा बना रहता है। उन्होंने सत्संग एवं
आध्यात्मिक ज्ञान को सकारात्मक सोच के लिए जस्री बताते हुए कहा कि हम अपने आत्मबल से अपना मनोबल बढ़ा सकते है। सत्संग के द्वारा प्राप्त ज्ञान और शक्तियां ही हमारी असली पूंजी हैं। उन्होंने  ने कहा कि राजयोग के निरंतर अभ्यास के द्वारा हम अपने कर्म इद्रियों को संयमित कर अपने आंतरिकसद्गुणों का विकास कर सकते
हैं। उन्होंने कहा कि मन बुद्धि के द्वारा चांद सूर्य से पार रहने वाली
परम शक्ति को मन बुद्धि से याद कर उनके गुणों का गुणगान करना ही राजयोग है
अतिथि --- ऋषिकेश शर्मा एस डी ओ मधुबनी ने भी अपना उद्बोधन दिया 

मुजफ्फपुर (बिहार )—होली मिशन सीनियर सेकण्डरी स्कूल में शिक्षको के लिए सेमिनार


मुजफ्फपुर (बिहार  )—होली मिशन  सीनियर सेकण्डरी स्कूल  में  शिक्षको के लिए  सेमिनार  आदर्श शिक्षक  विषय पर  चर्चा   
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र मुजफ्फपुर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-आदर्श शिक्षक 
प्रिंसिपल  ---सतप्रकाश जी 
डायरेक्टर ---राजीव कुमार सिंह 
डायरेक्टर ---रमेश ठाकुर 
डायरेक्टर ---गुणवंत कुमार मलिक 
डायरेक्टर ---अनिल कुमार सिंह 
बी के राजेंद्र भाई   
बी के शोभाकांन्त  भाई
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 
बी के भगवान भाई ने कहा कि शिक्षकों को केवल पाठ पढ़ाने वाला नहीं बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्ग दर्शन देने वाला होना चाहिए है। उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंदर सद्गुण होना आवश्यक है।उन्होंने कहा कि बिगड़ती परिस्थितियों को देखते हुए समाज को सुधारने की बहुत आवश्यकता है। वर्तमान के छात्र भावी समाज हैं। यदि भावी समाज को आदर्श बनाना चाहते हों तो छात्रों को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है। भगवान भाई ने कहा कि शिक्षा देने के बाद भी यदि बच्चे बिगड़ रहे हैं, उसका अर्थ मूर्तिकार में भी कुछ कमी है। शिक्षकों के केवल पाठ पढ़ाने वाला शिक्षक नहीं बल्कि सारे समाज को श्रेष्ठ मार्गदर्शन देने वाला शिक्षक बनाना है। 

उन्होंने कहा कि शिक्षक होने के नाते हमारे अंतर सदगुण होना जरु
अगर भावी समाज को आदर्श बनाना हैं तो छात्राओं को भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक आचरण पर भी उनके ऊपर ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षक वही है, जो अपने जीवन की धारणाओं से दूसरों को शिक्षा देता है।किताबी ज्ञान के साथ-साथ बच्चों को अपने जीवन की धारणाओं के आधार पर नैतिक पाठ भी आवश्यक पढ़ाना चाहिए। शिक्षकों के हाव-भाव, उठना, बैठना, चलना व व्यवहार करना इन बातों का असर भी बच्चों के जीवन में पड़ता है। वहीं स्थानीय ब्रह्मकुमारी राजयोग सेवा केंद्र के शोभाकांत  भाई ने कहा कि एक दीपक से पूरा कमरा प्रकाशित होता है।इसी तरह एक शिक्षक से हजारों बच्चे शिक्षित होते हैं। डायरेक्टर राजीव कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान की परिस्थितियों को परिवर्तन करने की जिम्मेवारी शिक्षकों की है। शिक्षकों को स्वयं के आचरण पर ध्यान देने के लिए आध्यात्मिक ज्ञान के साथ-साथ तनाव मुक्त रहने की आवश्यकता है। इस मौके पर सभी शिक्षक  मौजूद रहे।

भगवानपूर (बिहार )—आर पी सी जे उच्च विद्यालय नैतिक शिक्षा


भगवानपूर (बिहार  )—आर पी सी जे उच्च विद्यालय  बेलवाड जिला गरौल  में नैतिक शिक्षा विषय पर  प्रोग्राम  
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा 
प्रिंसिपल  ---डॉ रणजीत कुमार 
            टीचर ---धर्मवीर सिन्हा 
बी के ज्योति बहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
बी के वीरेंद्र   भाई इंजनियर शांतिवन 
बी के अमन भाई  
बी के विवेकानंद भाई  
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया     
 इस अवसर पर  राजयोगी बी.के. भगवान भाई ने कहा कि गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा   भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं। उन्होंने समाज में मूल्यों की कमी हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मूल्यांकन,आचरण,अनुकरण,लेखन,व्यवहारिक ज्ञान इत्यादि पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि अज्ञान रूपी अंधकार अथवा असत्य से ज्ञान रूपी प्रकाश अथवा सत्य की ओर ले जाए,वहीं सच्चा ज्ञान हैं।उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम ,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। स्थानीय राजयोग केन्द्र बहन ने कहा कि आध्यात्मिकता अपनाने पर जीवन में नैतिक मूल्यों का प्रवेश संभव हैं। 

भगवानपूर (बिहार )— जय गुरुदेव आवासीय विद्यालय वरिसपुर में नैतिक शिक्षा

भगवानपूर (बिहार  )— जय गुरुदेव आवासीय विद्यालय वरिसपुर में नैतिक शिक्षा विषय पर  प्रोग्राम  
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा 
प्रिंसिपल  ---पंकज मिश्रा 
   सह शिक्षक ---अलोक कुमार 
            बी के ज्योति बहन प्रभारी सेवाकेंद्र भगवानपूर (बिहार  )
            बी के वीरेंद्र   भाई इंजनियर शांतिवन 
            बी के अमन भाई  
            बी के विवेकानंद भाई  
इस कार्यक्रम कुछ अभिवाचक भी भाग लिया 
बच्चो ने कुछ डांस की भी प्रस्तुति दी 
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया     
सुखी जीवन के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। भौतिक
शिक्षा से हम रोजगार प्राप्त कर सकते हैं, लेकिन परिवार, समाज, कार्यस्थल में परेशानी या चुनौती का मुकाबला नहीं कर सकते।उक्त उद्गार ब्रह्माकुमारी माउंट आबू के बी के भगवान् भाई ने कहा नैतिक मूल्यों का महत्व विषय पर बोलते हुए कहा उन्होंने कहा की  नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व में निखार, व्यवहार में सुधार आता है।नैतिक मूल्यों का ह्रास व्यक्तिगत, सामाजिक, राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। समाज सुधार के लिए नैतिक मूल्य जरूरी है।उन्होंने कहा कि नैतिक शिक्षा की धारणा से, आंतरिक सशक्तीकरण से इच्छाओं को कम कर भौतिकवाद की आंधी से बचा जा सकता है। व्यक्ति का आचरण उसकी जुबान से ज्यादा तेज बोलता है। लोग जो कुछ आंख से देखते हैं। उसी की नकल करते हैं।

हमारे जीवन में श्रेष्ठ मू््ल्य है तो दूसरे उससे प्रमाणित होते हैं।जीवन में नैतिक मूल्य होंगे तो आदमी लालच, हिंसा, झूठ, कपट का विरोध
करेगा और समाज में परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा नैतिकता से मनोबल कम होता है। मूल्यों की शिक्षा से ही हम जीवन में विपरीत परिस्थिति का सामना कर
सकते हैं। जब तक हम अपने जीवन में मूल्यों और प्राथमिकता का निर्धारण नहीं करेंगे, अपने लिए आचार संहिता नहीं बनाएंगे तब तक हम चुनौतियों का
मुकाबला नहीं कर सकते। चरित्र उत्थान और आंतरिक शक्तियों के विकास के लिए आचार संहिता जरूरी है। उन्होंनेे अंत में नैतिक मूल्यों का स्रोत आध्यमित्कता को बताया। जब तक आध्यात्मिकता को नहीं अपनाएंगे जीवन में मूल्यों की धारणा संभव नहीं है।

मरेठ (उत्तर प्रदेश )—मरेठ जिले के गांव गांव में ईश्वरीय सन्देश


  • मरेठ (उत्तर प्रदेश )—मरेठ जिले के गांव गांव में ईश्वरीय सन्देश देने हेतु शिव सन्देश रथ यात्रा निकाली गयी जिसको हरी झण्डी देकर 1  महिने के लिए रवाना किया गया    
  • आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र श्रद्धा भवन कैन्ट मरेठ (उत्तर प्रदेश )
  • अतिथि ----
  •          लेफ्निनेंट कर्नल ----उपदेश शर्मा 
  •           के के छाबड़ा मार्शल सेक्युर्टी 
  •           ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू 
  •           लक्ष्मी  बहन प्रभारी मरेठ  श्रद्धा भवन कैन्ट मरेठ (उत्तर प्रदेश )
  •           बी के राजकिरण भाई बैंक मैनेजर 
  • विषय –-ईश्वरीय सन्देश       

  • भगवान भाई ने कहा यह रथ गांव गांव में जाकर 80  वर्षो से इस धरतीपर परमपिता परमात्मा आकर हम कौन  है ,परमात्मा कौन  है ,वर्तमान समय कौनसा चल रहा है ,समय परिवर्तन हो रहा है आदि आदि सन्देश देकर संसार का अंधकार मिटा देगा उन्होंने कहा यह रथ सभी को व्यसनों से मुक्त रहने का संदेश भी देगा भगवान् भाई ने कहा की वास्तव में  शिव सर्वआत्माओं के परमपिता हैं परमपिता परमात्मा शिव का यही परिचय यदि सर्व मनुष्यात्माओं को दिया जाए तो सभी सम्प्रदायों को एक सूत्र में बाँधा जा सकता है, क्योंकि परमात्मा शिव का स्मृतिचि- शिवलिंग के रूप में सर्वत्र सर्वधर्मावलंबियों द्वारा मान्य है। यद्यपि मुसलमान भाई मूर्ति पूजा नहीं करते हैं तथापिवे मक्का में संग-ए-असवद नामक पत्थर को आदर से चूमते हैं। क्योंकि उनका यह दृढ़ विश्वास है कि यह भगवान का भेजा हुआ है। अतः यदि उन्हें यह मालूम पड़ जाए कि खुदा अथवा भगवान शिव एक ही हैं तो दोनों धर्मों से भावनात्मक एकता हो सकती है। इसी प्रकार ओल्ड टेस्टामेंट में मूसा ने जेहोवा का वर्णन किया है। भगवान भाई ने कहा वह ज्योतिर्बिंदु परमात्मा का ही यादगार है। इस प्रकार विभिन्न धर्मों के बीच मैत्री भावना स्थापित हो सकती है। रामेश्वरम्‌ में राम के ईश्वर शिव, वृंदावन में श्रीकृष्ण के ईष्ट गोपेश्वर तथा एलीफेंटा में त्रिमूर्ति शिव के चित्रों से स्पष्ट है कि सर्वात्माओं के आराध्य परमपिता परमात्मा शिव ही हैं। शिवरात्रि का त्योहार सभी धर्मों का त्योहार है तथा सभी धर्मवालों के लिए भारतवर्ष तीर्थ है। यदि इस प्रकार का परिचय दिया जाता है तो विश्व का इतिहास ही कुछ और होता तथा साम्प्रदायिक दंगे, धार्मिक मतभेद, रंगभेद, जातिभेद इत्यादि नहीं होते। चहुँओर भ्रातृत्व की भावना होती। आज पुनः वही घड़ी है, वही दशा है, वही रात्रि है जब मानव समाज पतन की चरम सीमा तक पहुँच चुका है। ऐसे समय में कल्प की महानतम घटना तथा दिव्य संदेश सुनाते हुए हमें अति हर्ष हो रहा है कि कलियुग के अंत और सतयुग के आदि के इस संगमयुग पर ज्ञान-सागर, प्रेम वकरुणा के सागर, पतित-पावन, स्वयंभू परमात्मा शिव हम मनुष्यात्माओं की बुझी हुई ज्योति जगाने हेतु अवतरित हो चुके हैं। वे साकार प्रजापिता ब्रह्मा के माध्यम द्वारा सहज ज्ञान व सहज राजयोग की शिक्षा देकर विकारों के बंधन से मुक्त कर निर्विकारी पावन देव पद की प्राप्ति कराकर दैवी स्वराज्य की पुनः स्थापना करा रहे हैं। 
  •  लेफ्निनेंट कर्नल उपदेश शर्मा जी भी आपना उद्बोधन देते हुए कहा की यह रथ सभी को उमग उत्साह बढायेगा ईश्वर के प्रति श्रद्धा बढ़ाएगा बी के लक्ष्मी  बहन प्रभारी मरेठ  श्रद्धा भवन कैन्ट मरेठ ने भी अपना सम्बोधन देते हुए कहा की वर्तमान में सभी को आध्यत्मिकता की आवश्यकता है यह रथ सन्देश देगी 
  • इस कार्यक्रम में रथ डाइवर बी के देवराज भाई पानीपत ,डॉ  कल्याणी ,रघुवीर भाई आदि उपस्थित थे 

Tuesday, 16 January 2018

नैतिक शिक्षा 5000 स्कूल कॉलेजो में और 800 जेलों कारागृह में नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया
































































































फीरोजाबाद। छात्र-छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा जरूरी है। नैतिक शिक्षा से ही सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा। यह विचार प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, माउंट आबू, राजस्थान से आए राजयोगी ब्रह्म कुमार भगवान भाई ने गौरीशंकर इंटर कालेज, एसआरके कालेज, ब्रजश्री इंटर कालेज एवं कमला देवी उमा स्कूल के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते समय किया।
भगवान भाई ने कहा कि शैक्षणिक जगत में विद्यार्थियों के लिए नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना आज की आवश्यकता है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समस्या का मूल कारण है। उन्होंने कहा कि आज के विद्यार्थी कल का समाज हैं। इसलिए स्कूलों के माध्यम से इन्हें चरित्रवान बनाएं। स्थानीय केंद्र की ब्रह्मकुमार सरिता बहन ने कहा कि चरित्रवान बनने के लिए युवाओं को सिनेमा, व्यसन, फैशन एवं कुसंगति से दूर रहना होगा। इस दौरान एसआरके के प्रधानाचार्य धीरेंद्र राठौर, अनुपम शर्मा, कृपाशंकर मिश्रा, रामनाथ भाई, ऊषा देवी के अलावा अन्य शिक्षक मौजूद थे।5000 स्कूल कॉलेजो में और 800 जेलों कारागृह में नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाया