Friday, 19 October 2018

कौनसी बीमारी किस गुण व शक्ति की कमी से होती है

सप्तचक्र -

कौनसी बीमारी किस गुण व शक्ति की कमी से होती है।और कौनसी बीमारी के लिये, कौन सी किरणे और कौनसा अभ्यास करे, जो जल्दी ठीक हो जाये❓❓
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❆ जैसे हमारे शरीर का फोटोग्राफ निकलता हैं। वैसे ही हमारे आभामंडल(ओरा) का भी फोटोग्राफ निकलता है, उसे *कलरियन फोटोग्राफी* कहते है।
❆ उसमें हमारे शरीर के सातो चक्र विविध रंगो में पाये जाते हैं।हर चक्र हमारे शरीर से संबंधित सात विभागों को आत्मिक ऊर्जा पहुँचाता है।इन सातो विभागो से सम्बन्धित, सात मुख्य ग्रंथियाँ व मुख्य मुद्रायें व आत्मा के गुण भी हैं।
जिस विभाग का, जिस चक्र का रंग हल्का हो जाता हैं या घूमने की गति कम हो जाती है या चक्र उल्टा घूमने लगता है, तो उससे संबंधित अवयवों में बीमारी शुरू हो जाती हैं l
*यदि हम परमात्मा से चक्र से संबंधित गुण व किरणे प्राप्त करते हैं, तो चक्र सुचारू रूप से कार्य करने लग जाता है और बीमारी ठीक हो जाती है*।

❆ शरीर का हर अंग आत्मा के सातों गुणों से पोषित होता है, एक गुण उस अंग के विकास व संभाल के लिए अति आवश्यक हैं।
❆ 1. *सहस्त्रार चक्र*
-- पिनियल ग्रंथी और पाचन शक्ति
-- *रंग* :- जामुनी
-- *गुण* :- आंनद
ख़ुशी की चरमसीमा आनंद कहलाती है।
-- *बीमारी* :- तनाव, नींद न आना, हाई ब्लडप्रेशर, डिप्रेशन, एसिडिटी, गैस पाचन से सम्बंधित बीमारी आदि
-- *परमात्मा से संबंध* :- सिविल सर्जन
-- *विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ उनसे दिव्य चमकती हुई जामुनी रंग की किरणे, आनंद के गुण सहित, मेरे सहस्त्रार चक्र में प्रवेश कर रही हैं। बाबा मुझे स्पर्श कर रहे हैं।(इसे महसूस करे) जिससे मैं आत्मा आनंद का पुंज हो चुकी हूँ l मैं आत्मा मास्टर आनंद के सागर बनती जा रही हूँ।चक्र से संबंधित अवयवो की व्याधियाँ ठीक हो चुकी है l मैं आत्मा आनंद का अनुभव कर रही हूँ।

❆ 2. *आज्ञा चक्र*
-- पिट्यूटरी ग्रंथि और मष्तिक(brain) नर्वस सिस्टम
-- *रंग* :- गहरा नीला
-- *गुण* :- ज्ञान
-- *बीमारी* :- ब्रेन संबंधित, सिरदर्द,मायग्रेन,नर्वस सिस्टम, आँख, कान,नाक, दांत-मसूड़े संबंधित l
-- परमात्मा से संबंध :- सिविल सर्जन
-- *विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ उनसे दिव्य चमकती हुई गहरे नीले रंग की किरणे ज्ञान के गुण सहित मेरे आज्ञा चक्र में प्रवेश कर रही हैं l बाबा मुझे स्पर्श कर रहे हैं...इसे महसूस करे।मैं आत्मा मास्टर ज्ञान सूर्य बनती जा रही हूँ... जिससे चक्र से संबंधित अवयवो की व्याधियाँ ठीक हो चुकी है।बुद्धि विवेकशील व तीक्ष्ण हो चुकी हैं।

❆ 3. *विशुद्धि चक्र*
-- थॉयराइड ग्रंथी और फेफड़े
-- *रंग* :- आसमानी
-- *गुण* :- शांति
-- *बीमारी* :- श्वास के लगति बीमारी, टी .बी. न्यूमोनिया, दम, थॉयराइड संबंधित, स्वरयंत्र, अन्ननलिका, श्वासनलिका संबंधित l
-- परमात्मा से संबंध- सिविल सर्जन।
-- *विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ उनसे दिव्य आसमानी रंग की किरणे शांति के गुण सहित मेरे विशुद्ध चक्र में समा रही हैं l बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं l मुझमे शांति समाती जा रही है। जिससे चक्र से संबंधित अवयवो की व्याधियाँ ठीक हो चुकी है।मैं असीम शांति का अनुभव कर रही हूँ।

❆ 4. *अनहद चक्र*
-- थायमस ग्रंथी और हृदय
-- *रंग* :- हरा
-- *गुण* :- प्रेम
-- *बीमारी* - हृदय संबंधित, हार्टअटॅक, हार्ड में छेड़, धड़कन बढ़ना, हाई बीपी, कोरोनरी ऑटरी डिसिज, ब्लाकेज आदिl
प्रेम का सम्बन्ध दिल से होता है। जीवन जब प्रेम की कमी आती है तो हमे हृदय समन्धी बीमारी हो सकती है।
-- *परमात्मा से संबंध* :- सिविल सर्जन l
*विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ उनसे दिव्य चमकती हुई हरे रंग की किरणे प्रेम के गुण सहित मेरे अनहद चक्र में समा रही हैं l बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं l जिससे चक्र से संबंधित अवयवो की बीमारियाँ ठीक हो चुकी है l मैं असीम प्रेम का अनुभव कर रही हूँ।

❆ 5. *मणिपूर चक्र*
-- पँक्रियाज ग्रंथी और हॉर्मोन्स
-- *रंग* :- सुनहरा पीला
-- *गुण* :- सुख
-- *बीमारी* :- लिवर संबंधित, डायबिटीज, हार्मोनल इमबेलेंस आदि
-- *परमात्मा से संबंध* :- सिविल सर्जन
*विजन* - दृष्य बनाये एवं अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ... उनसे दिव्य सुनहरी चमकती हुई पीले रंग की किरणे सुख के गुण सहित मेरे मणिपुर चक्र में समा रही हैं।बाबा मुझे दृष्टि दे रहे हैं।मैं आत्मा मास्टर सुख का सागर के बनती जा रही हूँ।जिससे चक्र से संबंधित अवयवो की बीमारियाँ ठीक हो चुकी है l मैं असीम सुख का अनुभव कर रही हूँ।

❆ 6. *स्वादिष्टान चक्र*
-- ओवरीज, टेस्टीज ग्रंथी और इम्यून सिस्टम(रोगप्रतिकारक शक्ति)
-- *रंग* :- नारंगी
-- *गुण* :- पवित्रता
-- *बीमारी* :- इन्फेक्शन, त्वचारोग, रिप्रोडक्टीव अंग, खून संबंधित रोग।
-- *परमात्मा से संबंध* :- सिविल सर्जन
*विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ। उनसे दिव्य सुनहरी चमकती हुई नारंगी रंग की किरणे, पवित्रता के गुण सहित, मेरे स्वादिष्टान चक्र में समा रही हैं।बाबा मुझे पवित्रा का ताज पहना रहे है l ध्यान से देखे l मैं संपूर्ण पवित्र हो चुकी हूँ...मुझ आत्मा में पवित्रता समाती जा रही है...जिससे चक्र से संबंधित अवयवो की बीमारियाँ ठीक हो चुकी है...मैं असीम पवित्रता का अनुभव कर रही हूँ।

❆ 7. *मूलाधार चक्र*
-- अॅड्रनिल ग्रंथी और अस्ति(bone), मॉस(muscle)
-- *रंग* :- लाल
-- *गुण* :- शक्ति
-- *बीमारी* :- हड्डी व मांस से संबंधित, कॅल्शियम कम होना, जोड़ो में दर्द, सूजन, स्नायू में दर्द, बवासिर, रहमैटाइड आर्थरायटिज, यूरिक अॅसिड बढ़ना, घुटना घिस जाना l
-- *परमात्मा से संबंध* :- सिविल सर्जन
-- *विजन* :- दृश्य बनाये और अनुभव करें, मैं आत्मा शिवबाबा के सम्मुख बैठी हूँ उनसे शक्ति की लाल रंग की किरणे मेरे मूलाधार चक्र में समा रही हैं l मैं आत्मा मास्टर सर्वशकिवान बनती जाती हूँ। जिससे चक्र से संबंधित प्रत्येक अवयव स्वथ्य हो रहा हैं l सारी बीमारियाँ ठीक हो चुकी है। मैं आत्मा शक्तिओं का अनुभव कर रही/रहा है।

❆ ❆ *कमेन्ट्री का अभ्यास* ❆ ❆
हम जब बाबा की सारी शक्तियों को अपने पाँच तत्वों को शरीर व मन पर केंद्रित करते है।तब शरीर की कर्मेन्द्रिया, क्रियाशील, शक्तिशाली एवं पावन बनती है।इससे शरीर के रोगो उपचार स्वतः ही होने लगता है।आपस में सहयोग होने के कारण अन्तःस्राव किरणे अपने आप निकलती है।और पाँचो तत्व पावन बनते जाते है।इसमें हम सातो रंगो की शक्ति को प्रकृति से जोड़ते है।
*अब हम इस विधि से हीलिंग राजयोग का अभ्यास करेंगे*..
❆ *आनन्द की किरणे* ❆
सबसे पहले अपने मन को बाहरी बातों से हटाकर भृकुटि के बीच में केंद्रित कीजिए और अपने को इस देह की संचालक चैतन्य बिंदु आत्मा समझिए तीन बार अपने अंदर साँस भरिए और जितना देर साँस रोक सको उतना रोकिए अब आपका तन मन काफी शिथिल हो गया है.....
मैं एक आत्मा हूँ... शिवबाबा की आनन्द की किरणों को अपने मन पर केंद्रित होते देख रही हूँ... इससे पीयूष ग्रन्थि व भावनात्मक भाव पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है...और मेरे मन में आनन्द का संचार हो रहा है...मैं आत्मा परमानन्द में मग्न होती जा रही हूँ.... मेरी अंतः स्राव प्रणाली सुचारू रूप से कार्य कर रही है...मैं ईर्ष्या, तनाव की भावना, कामवासना घृणा आदि से मुक्त होती जा रही हूँ.... अब मैं आनन्दित हो रही हूँ....

❆ *ज्ञान की किरणे* ❆
अब मैं आत्मा ज्ञान की किरणों को अपनी बुद्धि पर केंद्रित होता देख रही हूँ....अब मेरी बुद्धि दिव्य बनती जा रही है..... जिससे मुझ आत्मा में परमात्मा और सृष्टि चक्र का ज्ञान स्पष्ठ होता जा रहा है... जिससे मन बुद्धि बीज समान बनती जा रही है... जिससे मेरा मन बुद्धि और संस्कारो पर शासन करने की क्षमता मजबूत होती जा रही है ...बुद्धि की याददाश्त बढ़ती जा रही है...

❆ *शान्ति की किरणे* ❆
अब मैं शान्ति की किरणों को अपने सूक्ष्म देह पर केन्द्रित होता देख रही हूँ...इससे आकाश पावन होता जा रहा है मेरे पाँचो विकार समाप्त होते जा रहे है.... मेरे अस्थमा रोग का उपचार होता जा रहा है.....थायराइड ग्रन्थि सुचारु रूप से काम कर रही है...मैं निर्बन्धन का अनुभव करती जा रही हूँ.... अब मैं सम्पूर्ण शान्ति का अनुभव करती रही हूँ...

❆ *प्रेम की किरणे* ❆
मैं आत्मा प्रेम की किरणों को अपने सूक्ष्म शरीर पर केन्द्रित होता देख रही हूँ...इससे भौतिक शरीर और प्रकृति के पाँचो तत्व पावन होते जा रहे है फलस्वरूप ह्दय वाहिका प्रणाली सुचारू रूप से कार्य कर रही है....इन प्रेम की किरणों के प्रवाह से धमनियों के अवरोध खुल रहे हैं.....और खून में प्राण वायु बढ़ती जा रही है...वायु विकार समाप्त हो रहे हैं.....प्रेम की किरणों के प्रवाह से मेरी थाईमलस ग्रन्थि सुचारू रूप से कार्य कर रही है.... मैं आत्मा निर्मोही बन रही हूँ......मोह समाप्त होता जा रहा है.....

❆ *सुख की किरणे* ❆
अब मैं आत्मा शिवबाबा की सुख की किरणों को सूक्ष्म देह पर केंद्रित होते देख रही हूँ .....इससे भौतिक शरीर व सम्पूर्ण विश्व का अग्नि तत्व पावन, सशक्त एवं क्रियाशील बनता जा रहा है......भूख, प्यास, आलस्य, थकान एवं निंद्रा पर नियंत्रण होता जा रहा है...... सुख की किरणों से पेट के अंदर की सभी प्रणालियां सुचारू रूप से क्रियान्वित हो रही हैं.....इन सुख की किरणों से आँखों की रोशनी बढ़ रही है और मधुमेह भी नियंत्रित हो रहा है.....क्योंकि इन्सुलिन का पर्याप्त उत्पादन हो रहा है.....
अहा ! अब मैं आत्मा हल्कापन एवं उमंग उत्साह का अनुभव कर रही हूँ.....मेरी पैंक्रियाज ग्रंथि सुचारू रूप से कार्य कर रही है....

❆ *पवित्रता की किरणे* ❆
अब मैं आत्मा शिवबाबा की पवित्रता सम्पन्न ऊर्जा किरणों को सूक्ष्म देह पर केन्द्रित होते देख रही हूँ......जिससे भौतिक शरीर एवं विश्व का सम्पूर्ण जल तत्व शुद्ध, सशक्त एवं क्रियाशील होता जा रहा हूँ......फलस्वरूप विसर्जन प्रणाली सुचारू रूप से क्रियाशील हो रही है......साथ ही आवश्यकतानुसार खून का बहाव एवं कोशिकाओं के अंदर एवं बाहर तरल पदार्थों पर नियंत्रण होता जा रहा है....पवित्रता की किरणों से ब्रह्मचर्य की शक्ति में वृद्धि हो रही है.....तथा इसके प्रभाव से स्फूर्ति, कार्यक्षमता एवं आयु बढ़ रही है.......ये पवित्रता की किरणें कैंसर एवं एड्स के उपचार के लिए भी उपयोगी हैं.......पवित्रता की किरणों से प्रजनन ग्रंथियां सुचारू रूप से कार्य करने लगी हैं....मैं आलस्य से मुक्त होकर स्फूर्ति का अनुभव कर रही हूँ.....मेरी रोग निरोधक क्षमता बढ़ रही है....

❆ *शक्ति की किरणे* ❆
मैं आत्मा परमात्मा शिव की शक्ति सम्पन्न ऊर्जा किरणों को सूक्ष्म देह पर केंद्रित कर रही हूँ.....इन शक्ति की किरणों से देह और सम्पूर्ण विश्व का पृथ्वी तत्व पावन एवं क्रियाशील बनता जा रहा है.....फलस्वरूप पृथ्वी तत्व से निर्मित शरीर के हड्ड़ी, मांस, चर्म, नाख़ून, केश आदि अंग पुष्ट होते जा रहे हैं.....पृथ्वी तत्व के पावन होने से एंड्रिलन ग्रन्थि सुचारू रूप से कार्य कर रही है जिससे इन अंगों के सभी रोग समाप्त हो रहे हैं और मैं आत्मा शक्तियों से सम्पन्न होती जा रही हूँ...

इस प्रकार नियमित योगाभ्यास से जहाँ एक ओर हमारा मन स्वच्छ होता है। दूसरी ओर हमारा तन एवं सम्पूर्ण जीवन स्वस्थ हो जाएगा।जब व्यक्ति स्वस्थ होगा, तो सारा समाज स्वस्थ हो जाएगा। अतः आपका स्वास्थ्य आपके हाथों में है।
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Wednesday, April 5, 2017

हीलिंग राजयोग - सात रंग की कोमेंट्री


हीलिंग राजयोग 
अब हीलिंग राजयोग का अभ्यास करेंगे - सर्वप्रथम अपने मनको सभी बाहरी बातों से मुक्त करेंगे उर स्वयं को चैतन्य ज्योति बिंदी आत्मा समझ भ्रकुटी मध्य में मस्तकमें बिराजमान होकर इस शरीर का सन्चालन करते हुए देखे --- धीरे धीरे श्र्वास को अन्दर लीजिए और एक से पंदर तक गिनती करते हुए श्र्वास भर ली जीयें - श्र्वासों को जितना समय आसानी से रोक शके इन समय रोक लिजियें - फिर - धीरे धीरे एक से पंदर तक गिनती करते छोड़ीयें - अब आप का तन और मन स्थित हो गया है  -------मैं आत्मा शिवबाबा की आनन्द की किरणों को मन पर क्न्द्रित होते देख रही हूँ - इसे प्रिन्यल ग्रंथि एवम भावात्मक देह पर गहेरा प्रभाव पड रहा है - और मेरे मनमें आनन्द का संचार हो रहा है - मैं आत्मा परमानंद में मग्न होती जा रही हूँ - मेरी अंतर स्त्राव प्रणाली सुजाणु रूप से कार्य कर रही है - मैं आत्मा भी कामवासना इर्षा राग देष और तनाव से मुक्त हो रही हूँ - अब मैं आत्मा अपने वास्तविक अवस्था आनंद की अनूभूति कर रही हूँ ---------- अब मैं आत्मा शिवबाबा की ज्ञान की उर्जा किरणों से अपने बुद्धि पर केन्द्रित होते देख रही हूँ - ज्ञान की इन किरणों से बुद्धि दिव्य बनती जा रही है - जिसे आत्मा परमात्मा वा सुष्टि चक्र का ज्ञान स्पष्ट होता जा रहा है - बुद्धि बीज समान सम्पन्न बनती जा रही है - जिसे मन वा संस्कारों पर शासन करने की क्षमता बढती जा रही है - बुद्धि की याददस्त बढती जा रही है - तंत्रिकातन्त्र एवम अन्त स्त्राव प्रलालियाँ प्रबल बनती जा रही है - जसे मेरी धारणा शक्ति बढ़ रही है - अन मैं तीव्र पुरुषार्थ करने में अपने को समर्थ अनुभव कर रही हूँ ---------  मैं आत्मा परमात्म शिव की शांति की किरणों को सूक्ष्म देह पर केन्द्रित होते हुए देख रही हूँ - शांति की किरणों से आकाश तत्व शान्त और पावन एवम क्रियाशील बनता जा रहा है - मेरी श्रवण शक्ति में वुर्द्धि हो रही है - और श्र्व्सन प्रणाली की नालियां खुल रही है - अस्थमा रोग का उपचार हो रहा है - शांति की किरणों से थाईरोडग्रंथि सुजाणु रूप से कार्य करने लगी है - पांच विकार समाप्त होते जा रहे है - मैं आत्मा शांति की किरणों से निर्विकारी बनती जा रही हूँ - मैं आत्मा अब निर्बन्धन शांति का अनुभव कर रही हूँ --------- अब मैं आत्मा शिवबाबा से प्रेम  की कारणों से मेरे सूक्षम देह पर केन्द्रित होते देख रही हूँ - इन प्रेम की किरणों से भौतिक शरीर वा प्रकुर्ती का वायुमंडल पवित्र ऐवम क्रियाशील बनता जा रहा है - फल स्वरूप हर्दय वाहिका प्रणाली सुजाणु रूप से कार्य कर रही है - इन प्रेम की किरणों के प्रवाह से धमनिओं के अवरोध खुल रहे है - और खून में प्राणवायु बढ़ता जा रहा है - प्रेम की किरणों के प्रवाह से मेरी थाईमस ग्रंथि सुजाणु रूप से कार्य कर रही है ------------अब मैं आत्मा शिवबाबा के सुख के किरणों को सूक्ष्म देह पर केन्द्रित होते देख रही हूँ - इसे भौतिक शरीर वा सम्पूर्ण विश्व का अग्नि तत्व पावन सशक्त एवम क्रियाशील बनता जा रहा है - भूख प्यास आलस्य थकान एवम निंद्रा पर नियंत्रण होता जा रहा है - सुख की किरणों से पेट के अन्दर की सभी प्रणालियाँ सुजाणु रूप से क्रियानित हो रही है - इन सुख के किरणों से आखों की रोशनी बढ़ रही है - और मधुप्रेम नियंत्रित हो हो रहा है - क्यूंकि इंस्युलिन का प्रयार्प्त हो रहा है - अब मैं आत्मा हल्कापन एवम उमंग उत्साह का अनुभव कर रही हूँ - मेरी प्रेनक्रियास ग्रंथि सुजाणु रूप से कार्य कर रही है ----------- अब मैं आत्मा शिवबाबा  की पवित्रता सम्पन्न उर्जा की किरणों को सूक्ष्म देह पर केन्द्रित होते देख रही हूँ - जिसे भौतिक शरीर एवम विश्व का सम्पूर्ण जल तत्व शुद्ध सशक्त और क्रियाशील होता जा रहा है - फलस्वरूप विसर्जन प्रणाली सुजाणु रूप से क्रियाशील हो रही है - साथ ही आवश्यकता अनुसार खून का बहाव एवम कोशिकाओं के भीतर तथा बाहरी तरल पदार्थों का नियंत्रण होता जा रहा है - इसके प्रभाव से स्फूर्ति कार्यक्षमता एवम आयु बढ़ रही है - पवित्रता के किरणों से केन्सर के रोग का निदान हो रह है - पवित्रता की किरणों से प्रजनन ग्रंथि सुजाणु रूप से कार्य करने लगी है - मैं आलस्य और अलबेलापन सर मुक्त स्फूर्ति का अनुभव हो रहा है - मेरी रोगनिरोधक क्षमता बढ़ रही है ---------- मैं आत्मा परमात्मा शिवशक्ति से सम्पन्न की ऊर्जा की किरणों को सूक्ष्म देह पर केन्द्रित के रही हूँ - इन शक्तियों की किरणों से देह और सम्पूर्ण विश्व का पुर्थ्वी तत्व पावन एवम क्रियाशील बनता जा रहा है - फलस्वरूप पुर्थ्वी तत्व से निर्मित शरीर के हड्डी मांस चरम नाखून केश आदि अंग पुष्ट होते जा रहे है - पुर्थ्वी के तव पावन होने से एड्रिनल ग्रंथि सुजाणु रूपसे कार्य कर रही है - जिसे इन अंगों के सभी रोग समाप्त हो रहे है - और मैं आत्मा शक्तियों से सम्पन्न होती जा रही हूँ -


सात रंग की कोमेंट्री  
स्वयं को भ्रकुटी के मध्य में अर्थात मस्तक में हापोथेलोमय एवम प्रीटयुटरी ग्लेंड के बिच में चमकती हुई ज्योति बिंदु सितारे के रूप में अनुभव कर रही हूँ ...... अब मैं ज्योति बिंदु आत्मा स्वयं को देह से बहार शिर से आठ इंच ऊपर स्थित कर रही हूँ .... मैं स्वयम को विदेही देख रही हूँ .... मैं विदेही आत्मा स्वयम को अपने निराकारी सम्पूर्ण स्वरूप में देख रही हूँ .... इन सातों गुणों की संकल्पना करते हुए अपने सम्पूर्ण स्वरूप का आनंद ले रही हूँ .... शिवबाबा ने मुझ विदेही आत्मा को इन सातों गुणों के सम्पूर्ण स्वरूप में देख हूँ ..... अब में विदेही आत्मा सूर्य चाँद तारागण से भी पार सूक्ष्म लोक से परे अपने स्वदेश परमधाम में पहुँच गइ हूँ ..... परमात्मा को बेहद सतरंगी प्रकाश की किरणों का अन्ता में फैलाते हुए देख रही हूँ ..... परम प्रिय परमपिता शिव परमात्मा अपने सतरंगी किरणों को मुझ आत्मा पर फैला रहे है ...... 
अब मैं परम शिक्षक शिवबाबा से निकलती हुई ज्ञान की गहरी नीली किरणों को मेरी और आते हुए देख रही हूँ ...... ये किरणे मेरे अन्दर ज्ञान के गहरे नीले क्षेत्र को आलोकित कर रही है ..... ज्ञान के भिन्न भिन्न गुह्य राज मेरे अन्दर स्पष्ट होते जा रहे है .... मैं आत्मा मास्टर त्रिकालदर्शी मास्टर त्रिलोकीनाथ मास्टर मास्टर बिज स्वरूप बन गइ हूँ .... शिवबाबा से निकलती हुई ज्ञान की गहरी नीली किरने मेरे ज्ञान के क्षेत्र को परमधाम से साकार लोक में प्रवाहित हो रही है .... और करोडो आत्माओं के ज्ञान के क्षत्रे को आलोकित कर रही है ... अब इन आत्माओं का सीधा सबंध शिवबाबा से जोड़ने के कारण ये आत्मायें ज्ञान से सम्प्पन होती जा रही है और ज्ञान की गहरी नीली किरणों की लहरे सारे विश्व में फैल रही है --- अब मैं आत्मा शिवबाबा पर-मा से निकलती हुई शांति की आसमानी रंग की किरणों को मेरी और आती हुई देख रही हूँ ..... ये किरणे मेरे अन्दर शांति के क्षेत्र को आलोकित कर रही है .... मुझे परम शांति की अनुभूति हो रही है .... शिवबाबा की ये आसमानी रंग की शांति की किरणें मेरे शांति के क्षेत्र को भरकर साकार लोक में पहुँच रही है .... और अनेक आत्माओं को शांति के क्षेत्र को भरकर सारे विश्व में फैल रही है ---- अब मैं आत्मा शिव साजन से निकलती हुए आत्मिक प्रेम की हरे रंग की किरणों को मेरे और आती हुई देख रही हूँ ..... हरे रंग की किरणे मेरे प्रेम क्षेत्र को आलोकित कर रही है ... मैं प्रेम की इन हरे रंग की किरणों से सम्प्पन हो गई हूँ .... ये किरणों अब साकार लोक में पहुँच कर अनेक आत्मा के प्रेम के क्षेत्र को सम्प्पन कर सारे विश्व में प्रेम की हर रंग की लहरों को उत्पन्न कर रही है ---- अब शिवबाबा सखा से निकलती हुहे अति इन्द्रिय सुख की पीले रंग की किरणे मुज आत्मा के सुख के क्षेत्र को आलोकित कर रही है ... मैं अतिइन्द्रिय सुख के झूले में झूल रही हूँ ... मेरे सुख के क्षेत्र को भरकर बाबा की पीले रंग की किरने साकार लोक में पहुँच कर अनेक आत्माओं के सुख के क्षेत्र को सम्पन्न कर सरे विश्व में अतिइन्द्रिय सुख की लहरों को उत्पन्न कर रही है ----अब परम सद्गुरु शिवबाबा से निकलती हुई पवित्रता की नारंगी रंग की - सफेद रंग की किरणें मेरे पवित्रता के क्षेत्र को प्रकाशित कर रही है .... मैं आत्मा पवित्र की शक्ति से स्वयं को सम्पन्न अनुभव कर रही हूँ ... ये किरणे साकार लोक में पहुँच कर अनेक आत्माओं के पवित्रता के क्षेत्र को सम्पन्न करके सारे विश्व में पवित्रता की नारंगी सफेद लहरे फैला रही हूँ ----अब सर्वशक्तिवान शिवबाबा से निकलती हुई सर्व शक्तियों की लाल किरणें मेरे शक्ति के क्षेत्र को भरपूर कर रही है ... मैं आत्मा स्वयं को मास्टर सर्वशक्तिवान अनुभव कर रही हूँ .... बाबा की शक्तिशाली ये लाल किरणे अब साकार लोक में पहुँच कर अनेक आत्माओं के शक्ति के क्षेत्र को सम्पन्न कर सारे विश्व में शक्ति की लाल किरणों फैला रही हूँ ----अब शिव परमात्मा बालक के रूप में आनंद की बेगनी रंग की किरणों से मेरे आनंद के क्षेत्र को आलोकित कर रही है .... मैं परम आनंद का अनुभव कर रही हूँ .... और अनेक आत्माओं के आनंद के क्षेत्र को सम्पन्न कर रही है .... बाबा की ये बेगनी रंग की किरने अब सारे विश्व में आनंद की लहरों को फैला रही है ... विश्व की आत्मायें अपने दुःख दर्द को भुलाकर आनन्दित हो रही है ---- इस प्रकार मैं आत्मा अपने सातों मोलिक गुणों से सम्पन्न एवं सम्पूर्ण होकर साकार लोक में पहुँच पुनह अपने भ्रकुटी सिहाशन पर बिराजमान हो जाती हूँ .... अब मेरे संस्कार सातों मौलिक गुणों से सम्पन्न हो गये है .... इसलिए हमारे मन के केवल शुद्ध संकल्प ही उठ रहे है .... अब हमारा मन एवम बुद्धि दिव्यता से सम्पन्न है ... मेरा द्रष्टिकोण सकारात्मक हो गया और मेरा व्यवहार मूल्यनिष्ठ हो गया है ... मैं सम्पूर्ण दिव्यता से सम्पन्न बन गइ हूँ ---


भगवान बैठ भक्तों को समझाते हैं। भक्त हैं भगवान के बच्चे। सभी हैं भक्तबाप है एक। दो अक्षर ही याद करो - मनमनाभवमध्याजी भव। प्राचीन भारत का धर्म शास्त्र है ही एक। यही भारत नया था लिखा है ईश्वरीय विश्व विद्यालय। तो समझना चाहिए जरूर ईश्वर का बहुत भारी विद्यालय होगा। सो भी विश्व के लिए है। सभी को पैगाम भी देना है कि देह सहित सभी धर्मो को छोड़ अपने स्वधर्म में टिकोफिर अपने बाप को याद करो तो अन्त मती सो गति हो जायेगी। अब बाबा के पास लौटना है। बाबा का वर्सा है ही राजाई इसलिए इस पर नाम पड़ा है राजयोग। तुम अशरीरी आये थे .. अब फिर अशरीरी बनो। सबका सद्गति दाता एक बाप ही हैतुमको अशरीरी भेजा था। अब भी अशरीरी होकर मेरे साथ चलना है। इसको नॉलेज अथवा शिक्षा कहा जाता है। इस शिक्षा से ही सद्गति होती है। योग से तुम एवरहेल्दी बनते हो। बाप कहते हैं मेरा जन्म भी भारत में होता है। बाप खुद कहते हैं मुझे ब्रह्मा मुख द्वारा ब्राह्मण वंशावली रचनी है। यहाँ तो पाठशाला हैपढ़ना है, मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

01 01 2018 HMS EME OMSHANTI
मीठे बच्चे - मरजीवा बने हो तो सब कुछ भूल जाओएक बाप जो सुनाते हैंवही सुनो और बाप को याद करोतुम्हीं संग बैठूँ - प्रश्नः- सद्गति दाता बाप बच्चों की सद्गति के लिए कौन सी शिक्षा देते हैं?उत्तर:- बाबा कहते - बच्चे सद्गति में जाने के लिए अशरीरी बन बाप और चक्र को याद करो। योग से तुम एवरहेल्दीनिरोगी बन जायेंगे। फिर तुम्हें कोई भी कर्म कूटने नहीं पड़ेंगे। प्रश्नः- जिनकी तकदीर में स्वर्ग के सुख नहीं हैंउनकी निशानी क्या होगी? उत्तर:- वह ज्ञान सुनने के लिए कहेंगे हमारे पास फुर्सत ही नहीं है। वो कभी ब्राह्मण कुल के भाती नहीं बनेंगे। उन्हें पता ही नहीं पड़ेगा कि भगवान भी किसी रूप में कभी आते हैं। गीत:- तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है...ओम् शान्ति। धारणा के लिये मुख्य सार:- 1) तीव्र पुरुषार्थ के लिए याद का चार्ट जरूर रखना है। रोज़ आइने में अपना मुँह देखना है। चेक करना है - हम मोस्ट बिलवेड बाप को कितना समय याद करते हैं! 2) जो कुछ पढ़ा है वह भी भूल चुप रहना है। मुख से कुछ भी कहना नहीं है। बाप की याद से विकर्म विनाश करने हैं। वरदान:- ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रख हद को बेहद में समाने वाले बेहद के बादशाह भव फालो फादर करना अर्थात् मेरे को तेरे में समाना,हद को बेहद में समानाअभी इस कदम पर कदम रखने की आवश्यकता है। सबके संकल्पबोलसेवा की विधि बेहद की अनुभव हो। स्व-परिवर्तन के लिए हद को सर्व वंश सहित समाप्त करोजिसको भी देखो वा जो भी आपको देखे - बेहद के बादशाह का नशा अनुभव हो। सेवा भी होसेन्टर्स भी हों लेकिन हद का नाम निशान न हो तब विश्व के राज्य का तख्त प्राप्त होगा। स्लोगन:- अपने ख्यालात आलीशान बना लो तो छोटी-छोटी बातों में टाइम वेस्ट नहीं जायेगा।
Essence: Sweet children, since you have died a living death, you have to forget everything. Only listen to what the one Father explains and remember the Father: “I sit with You alone…”Question: What teachings are given by the Father, the Bestower of Salvation, for the salvation of you children?Answer: Baba says: Children, in order to attain salvation, become bodiless and remember the Father and the cycle. Through this yoga you will become ever healthy and free from disease and you will not have to repent for any of your actions.Question: What is the sign of those who do not receive the fortune of the happiness of heaven Answer: When it comes to listening to knowledge, they say that they don’t have time. They will never become members of the Brahmin clan. They will also never even know that God comes in a certain form. Song: The heart desires to call You. Om shanti.  Essence for dharna:   In order to make your efforts fast, it is essential to keep a chart of remembrance. Everyday look at your face in the mirror and check: How long do I remember the most beloved Father? Forget everything you have studied and remain silent. There is no need to say anything. Have your sins absolved by having remembrance of the Father. Blessing: May you be an emperor of the unlimited and merge anything limited into the unlimited by placing your steps in Father Brahma’s footsteps. To follow the father means to merge “mine” into “Yours”, to merge anything limited into the unlimited. There is now a need to take these steps. Everyone’s thoughts, words and methods of service have to be experienced to be unlimited. For self-transformation, finish all trace of anything limited. Whomever you see and whoever sees you, let there be the intoxication of being an emperor of the unlimited. There may be centres, there may be service but let there not be any name or trace of anything limited for only then will you claim the throne of the kingdom of the world. Slogan: Make your thoughts royal and beautiful and your time will not be wasted in trivial matters.

हम आत्माएं रूहानी मीठे स्किल्धे ब्राहमण वंशावली मरजीवा बिंदी बच्चे ..
हम आत्माएं राजयोगी राजऋषि अशरीरी बिंदी बच्चे ...
हम आत्माएं बाप और चके की याद वाले चक्रवती बिंदी बच्चे ..
हम आत्माएं बेहद के बादशाह भव बिंदी बच्चे ...
हम आत्माएं आलिशान ख्यालात वाले बिंदी बच्चे ...
हम आत्माएं ब्रह्मा बाप के कदम पे कदम रखने वाले बिंदी बच्चे

सर्वसबंधी सबकुछ गीताज्ञानदाता सद्गतिदाता परमपिता परमात्मा रचता मोस्ट बिलवेड रचयिता सद्गतिदाता ...
 हम आत्माएं एक मोस्ट बिलवेड बाप को याद करें वाले बेहद के वैरागी राजऋषि मरजीवा ब्राहमण बच्चे .. बाप और चक्र की याद वाले रूद्र माला के दाने सो चक्रवर्ती राजयोगी राजा .. एक बाप की याद वाले अंत मती सो श्रेष्ठ गति वाले अशरीरी अव्यक्त एवरहेल्दी निरोगी .. बाप के समीप सन्मुख साथ वाले .. याद् का चार्ट .. याद की दौड़ी .. योग की यात्रा .. परमधाम में बाप के साथ विशेष चमकती मणी .. अशरीर बन बाप के साथ वापिस जाने वाले लायक पवित्र पावन सतोप्रधान निर्मोही मोहजीत जागतीज्योत .. याद के चार्ट से तीव्र पुरुषार्थ ... अथक बन याद का चार्ट .. स्व चेकिंग .. बाप की याद में साइलेंसस्वरूप स्वधर्मस्वरूप शांतस्वरूप .. मन्मनाभव .. मद्याजीभव .. ओमशांति के अर्थ स्वरूप .. विशेष मोती .. स्नेह का हिरा ...
हम आत्माएं सतयुग स्वर्ग के पवित्र पावन सतोप्रधान सूर्यवंशी देवी है देवता है ... दिव्य पवित्र देह में है दिव्यगुणधारी दिव्यस्वरू देवता .. न्यारे प्यारे निराले उंच हर्षित रियल रॉयल देवता ... दैवी बगीचे के पावन फूल ... सत्यनारायण स्वरूप में स्थित है ...
प्रभु पैगाम --- अपने स्वधर्म में टीको ... स्वधर्मस्वरूप शांतस्वरूप .... हम आत्माएं न्यारे प्यारे निराले रूहानी मीठे शांत शीतल पूज्य पूर्वज में स्थित है ...
 हम आत्माएं सहज राजयोग का गुह्य रमणीक ज्ञान वा शिक्षा श्रीमत नोलेज को वा आदि मध्य अंत का ज्ञान को एक बाप से सुनने पढ़ने लिखने वाले भगवान बाप के राजयोगी राजऋषि मरजीवा ब्राहमण वंशावली बच्चे .. बाप अंग संग बैठने वाले बेहद के वैरागी .... अमूल्य अंतिम जीवन वाले .... उंच जन्म वाले ... तुम्ही से खाऊ ... तुम्हे से बैठू .. तुम्ही से सुनु ... तीव्र पुरुषार्थ ... राजयोग से राजाई का वर्सा ... शिक्षा से सद्गति ...
हम आत्माएं ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रख हद को बेहद में समाने वाले बेहद के बादशाह भव फरिश्ते .. हम आत्माएं संकल्प बोल सेवा की विधि में बेहद के फरिश्ते ...  हम आत्माएं हद के सर्ववंश की समाप्ति करें वाले फरिश्ते  ... विश्वराज्य तख्तनशीं फरिश्ते ... हम आत्माएं संकल्प बोल कर्म में आलिशान स्वरूप के समर्थ फरिश्ते ... रिटर्न जर्नी वाले समान सम्पन सम्पूर्ण फरिश्ते ...
हम आत्माएं सोलह श्रुन्गार में सम्पन सम्पूर्ण सो ... सर्वगुण सम्पन ... सोलह कला सम्पूर्ण .... सम्पूर्ण निर्विकारी  .. मर्यादापुरुसोत्तम ... डबलअहिंसक ... डबल ताजधारी तख़्तधारी तिलकधारी ... डबलसिरताज... डबललाइट .. डबलसेवाधारी .. डबलवैष्णव .. डबलनोलेजफूल ... डबलछत्रधारी ... डबलओमशांति स्वरूप बन बाप के नयनों में .. बाप की गोद में .. बाप के दिल में .. बाप के मस्तक में .. बाप के ह्रदय में .. समाये हुए यथार्त परिवर्तन वाले सदा उंच हर्षित मालाधारी माला के चमकते मनके है .. नयनों के नूर है ... नुरे रत्न है .. जग की ज्योति .. जागतीज्योत है .. यही लाइट हम से उतर कर सर्व में समाती जा रही है ..http://madhubanmurli.org


अव्यक्त सीज़न ०५ १२ २०१७ होमवर्क  ----  वाह !!! मेरे दिल में समाने वाले विशेष मोती वाह !!! यह वर्ष २०१८ है ही स्नेह का वर्ष .. सभी स्नेह में समाने का अनुभव करेंगे .... स्नेह का वर्ष –..  5 12 2017 ----- रिवाइज़ वीडियो ----- 15 12 2006 ------स्मुर्तीस्वरूप अनुभवीमूर्त बन सकेंड की तीव्रगति से परिवर्तन कर पास विद ऑनर बनो  -- 10 11 2017 --- रिवाइज़ महावाक्य --- 31 10 2007 ----  जब चाहो तब अपने अशरीरी बनने की .. फरिश्ता स्वरूप बनने की एकसरसाइज करते रहो ... अभी अभी ब्राहमण .. अभी अभी फरिश्ता ... अभी अभी अशरीरी ... चलते फिरते कामकाज करते हर भी एक मिनिट दो मिनट निकाल अभ्यास करो –--- चारो और के सदा श्रेष्ठ स्व्मानधारी सदा स्वयं को परमपूज्य और पूर्वज अनुभव करें वाले सदा अपने को हर सब्जेक्ट में अनुभवी स्वरूप बनाने वाले ... सदा बाप के दिलतख़्तनशीन ..  भ्रकुटी के तख्तनशीन .... सदा श्रेष्ठ स्थिति के अनुभवो में स्थित रहें वाले .. चारो और के सभी बच्चों को याद प्यार और नमस्ते ---- 08 10 2017 AVYAKT MURLI – रिवाइज़ 30-11-06 -- ज्वालामुखी तपस्या द्वारा मैं-पन की पूंछ को जलाकर बापदादा समान बनो तब समाप्ति समीप आयेगी”


31 12 2017 SEASONS AVYAKT MURLI 2017 – 2018
नये वर्ष की समाप्ति वर्ष .. श्रेष्ठ वर्ष और दुनिया को जगाने का वर्ष  इस रूप में मनाओ ...
नये साल में कदम आगे बढाने का वरदान है ---- बाप समान भरपूर तैयार रखना ..विजयी तो है लेकिन यह विजय अपने में आत्मा विशवास और परिवार में निश्चय को बढा देती है -- यही दोनों बातें अपने राज्य में काम में आएगी -- परिवार का प्यार ज्यादा और नेचरल ... खुद को लायक बनाना है --- अटेंशन अपने ऊपर देना – यह जरुरी है ... राजधानी में क्या सिट लेनी है ... भविष्य राजधानी पर ध्यान .. नम्बर लेना ... पास होना है ... पेपर देने के लिए तैयार ...पेपर देने से प्राप्ति भी इतनी है –
ज्ञान योग धारणा सेवा ------- लक्ष्य को प्रक्टिकल में ... हिमत्त उउमंग उत्साह से आगे बढना .. लक्ष्य प्लेन पर अटेंशन  ... स्वराज्य अधिकारी  … निश्चित विजयी ... सदा स्थेरियम सदा नशा – अभ्यास अटेंशन .. राज्य भाग्य की अधिकारी  … बाप समान सर्वगुण सम्पन्न .. ताज तख़्तधारी ... सर्व विशेषता -- बाप का नाम प्रसिद्द करें वाले .. धारणास्वरूप का साक्षात्कार ....
अव्यक्त बापदादा के अवतरण दिवस पर वीडियो द्वरा सुनाने के लिए अव्यक्त महावाक्य – रिवाइज़ – ३१ १२ ०७ -----
अनेक बार बाप समान बने है बार बार बनते रहेंगे ... होम वर्क है ---- संगम का एक सेकंड एक वर्ष के बराबर है --- व्यर्थ गवां माना अलबेलापन  ... सफलता मेरा जन्म सिद्धि अधिकार है .. सफलता मेरे गले का हार ... सफलतास्वरूप सफलतामूर्त सदाअर्ल्ट ... निराकारी निर्विकारी निरहंकारी मन्त्र को रिवाइज़ रियलाइज़ करें से समान बन जायेंगे --- सफलता अनेक जन्म साथ रहें वाली है ---
ज्ञान योग धारणा सेवा ------ खजानों के सम्पन्न – सफलता की प्रारलब्ध .. डबल सभा ... डबल पुरुषार्थ ... वाह वाह कहने वाले .. परम अच्छा --- कमाल दिखाने वाले डबल पुरुषार्थी नया हिम्मत उमंग उत्साह .. स्व परिवर्तन का उमंग ... सर्व प्राप्तिस्वरूप .. लकी लवली बच्चे  ... ख़ुशी का उत्साह ... जगा चमकता दीपक ... अविनाशी दीप ... सर्व प्रकार की नवीनता ... प्रकुर्ती के मालिक प्रकुर्तीपति ---मस्तक में चमकता आत्म दीप ... एक संकल्प एकरस स्थति में स्थित ... परमात्मा प्यार में लवलीन एकाग्र बुद्धि से स्नेह में समाये हुए ... बाप समान सम्पन सम्पूर्ण  ...स्मुर्तीस्वरूप ... विजय माला के नजदीक का मनका --- रूहानी नशे निशाने निश्चय वाले ... फूल निश्चय ... दृढ निश्चयबुद्धि .. सफल और व्यर्थ का चार्ट ---- एक ही स्वभाव संस्कार एक ही सेवा लक्ष्य .. उमंग उत्साह की लहर फैलायेंगे ... परिवर्तन के निमित ... विश्व के फाउंडेशन पूज्य पूर्वज ---- श्रेष्ठ वुर्ती से विशेष वायब्रेशन फैलाने ---– सर्व खजानों को सफल करने कराने वाले सफलतास्वरूप सफलतामूर्त .. समर्थस्वरूप ...हरसकेंड हरश्वास हरसंकल्प हरशक्ति हरगुण को सफल करें वाले सफलतामूर्त ... स्व प्रति और विश्व प्रति सफल करें वाले  --- अखंड महादानी निरतंर सेवाधारी ... शांति की शक्ति फैलाए --- सम्पूण फरिश्ता ...


01 01 2018 HINDI ENGLISH MURLI OMSHANTI

01 01 2018 HINDI ENGLISH MURLI OMSHANTI
01/01/18 प्रात:मुरली ओम् शान्ति "बापदादा"मधुबन

''मीठे बच्चे - मरजीवा बने हो तो सब कुछ भूल जाओएक बाप जो सुनाते हैंवही सुनो और बाप को याद करोतुम्हीं संग बैठूँ''
प्रश्नः- सद्गति दाता बाप बच्चों की सद्गति के लिए कौन सी शिक्षा देते हैं?
उत्तर:- बाबा कहते - बच्चे सद्गति में जाने के लिए अशरीरी बन बाप और चक्र को याद करो। योग से तुम एवरहेल्दीनिरोगी बन जायेंगे। फिर तुम्हें कोई भी कर्म कूटने नहीं पड़ेंगे।
प्रश्नः- जिनकी तकदीर में स्वर्ग के सुख नहीं हैंउनकी निशानी क्या होगी?
उत्तर:- वह ज्ञान सुनने के लिए कहेंगे हमारे पास फुर्सत ही नहीं है। वो कभी ब्राह्मण कुल के भाती नहीं बनेंगे। उन्हें पता ही नहीं पड़ेगा कि भगवान भी किसी रूप में कभी आते हैं।
गीत:- तुम्हारे बुलाने को जी चाहता है...

ओम् शान्ति। भगवान बैठ भक्तों को समझाते हैं। भक्त हैं भगवान के बच्चे। सभी हैं भक्तबाप है एक। तो बच्चे चाहते हैं एक जन्म तो बाप के साथ भी रहकर देखें। देवताओं से भी बहुत जन्म बीते। आसुरी सम्‍प्रदाय के साथ भी बहुत जन्म बीते। अब भक्तों की दिल होती है - एक जन्म तो भगवान के बनकर भगवान के साथ रहकर देखें। अभी तुम भगवान के बने होमरजीवा बने हो तो भगवान के साथ रहते हो। यह जो अमूल्य अन्तिम जीवन है इसमें तुम परमपिता परमात्मा के साथ रहते हो। गायन भी है - तुम्हीं से खाऊंतुम्हीं से बैठूँतुम्हीं से सुनूँ...। जो मरजीवा बनते हैं उनके लिए यह जन्म साथ रहना होता है। यह एक ही है ऊंचे ते ऊंचा जन्म। बाप भी एक ही बार आते हैं,फिर तो कभी आ नहीं सकेंगे। एक ही बार आकर बच्चों की सर्व कामनायें पूर्ण कर लेते हैं। भक्तिमार्ग में मांगते बहुत हैं। साधू-सन्त,महात्माओंदेवी-देवताओं आदि से आधाकल्प से माँगते रहते हैं और दूसरा जपतपदानपुण्य आदि भी जन्म बाई जन्म करते ही आये हैं। कितने शास्त्र पढ़ते हैं। अनेकानेक शास्त्र मैगजीन आदि बनाते थकते ही नहीं। समझते हैं इनसे ही भगवान मिलेगापरन्तु अब बाप खुद कहते हैं - तुम जन्म-जन्मान्तर जो कुछ पढ़े हो और अब यह जो कुछ शास्त्र आदि पढ़ते होइनसे कोई मेरी प्राप्ति नहीं होगी। बहुत किताब आदि हैं। क्रिश्चियन लोग भी कितना सीखते हैं। अनेक भाषाओं में बहुत कुछ लिखते ही रहते हैं। मनुष्य पढ़ते ही रहते हैं। अब बाप कहते हैं जो कुछ पढ़े हो वह सब भूल जाओ अथवा बुद्धि से मार दो। बहुत किताब पढ़ते हैं। किताबों में है फलाना भगवान है,फलाना अवतार है। अब बाप कहते हैं मैं खुद आता हूँतो जो मेरे बनते हैं उनको मैं कहता हूँ इन सबको भूल जाओ। सारे दुनिया की और तुम्हारी बुद्धि में जो बात नहीं थीवह अब मैं तुमको सुनाता हूँ। अब तुम बच्चे समझते हो बरोबर बाबा जो समझाते हैं वह कोई शास्त्र आदि में है नहीं। बाप बहुत गुह्य और रमणीक बातें समझाते हैं। ड्रामा के आदि-मध्य-अन्तरचता और रचना का सारा समाचार तुमको सुनाते हैं। फिर भी कहते हैं अच्छा जास्ती नहीं तो दो अक्षर ही याद करो - मनमनाभवमध्याजी भव। यह अक्षर तो भक्तिमार्ग की गीता के हैंपरन्तु बाप इसका अर्थ अच्छी रीति समझाते हैं। भगवान ने तो सहज राजयोग सिखाया हैकहते हैं सिर्फ मुझ बाप को याद करो। भक्ति में भी बहुत याद करते थे। गाते भी हैं दु:ख में सुमिरण सब करें.. फिर भी कुछ समझते नहीं। जरूर सतयुग त्रेता में सुख की दुनिया है तो याद क्यों करेंगेअब माया के राज्य में दु:ख होता है तब बाप को याद करना होता है और फिर सतयुग में अथाह सुख भी याद आता है। उस सुख की दुनिया में वही थेजिन्होंने बाप से संगमयुग पर राजयोग और ज्ञान सीखा था। बच्चों में देखो - हैं कैसे अनपढ़। उन्हों के लिए तो और ही अच्छा हैक्योंकि कहाँ भी बुद्धि जाती नहीं है। यहाँ तो सिर्फ चुप रहना है। मुख से भी कुछ नहीं कहना है। सिर्फ बाबा को याद करते रहो तो विकर्म विनाश होंगे। फिर साथ ले जाऊंगा। यह बातें कुछ न कुछ गीता में हैं। प्राचीन भारत का धर्म शास्त्र है ही एक। यही भारत नया थाअब पुराना हुआ है। शास्त्र तो एक ही होगा ना। जैसे बाइबिल एक हैजब से क्रिश्चियन धर्म स्थापन हुआ है तो अन्त तक उनका शास्त्र एक ही है। क्राइस्ट की भी बहुत महिमा करते हैं। कहते हैं उसने पीस स्थापन की। अब उसने तो आकर क्रिश्चियन धर्म की स्थापना कीउसमें पीस की तो बात ही नहीं। जो आते हैं उनकी महिमा करते रहते हैं क्योंकि अपनी महिमा को भूले हुए हैं। बौद्धक्रिश्चियन आदि अपने धर्म को छोड़ औरों की महिमा नहीं करेंगे। भारतवासियों का अपना धर्म तो है ही नहीं। यह भी ड्रामा में नूँधा हुआ है। जब बिल्कुल ही नास्तिक बन जाते हैं तब ही फिर बाप आते हैं।

बाप समझाते हैं बच्चे स्कूलों आदि में जो किताबें पढ़ाई जाती हैं उनमें फिर भी एम-आबजेक्ट है। फायदा हैकमाई होती है। मर्तबा मिलता है। बाकी शास्त्र आदि जो पढ़ते हैंउसको अन्धश्रद्धा कहा जाता है। पढ़ाई को कभी भी अन्धश्रद्धा नहीं कहेंगे। ऐसे नहीं कि अन्धश्रद्धा से पढ़ते हैं। पढ़ाई से बैरिस्टरइन्जीनियर आदि बनते हैं,उसको अन्धश्रद्धा कैसे कहेंगे। यह भी पाठशाला है। यह कोई सतसंग नहीं। लिखा है ईश्वरीय विश्व विद्यालय। तो समझना चाहिए जरूर ईश्वर का बहुत भारी विद्यालय होगा। सो भी विश्व के लिए है। सभी को पैगाम भी देना है कि देह सहित सभी धर्मो को छोड़ अपने स्वधर्म में टिकोफिर अपने बाप को याद करो तो अन्त मती सो गति हो जायेगी। अपना चार्ट लिखना हैकितना समय हम योग में रहते हैं। ऐसे नहीं हर एक रेगुलर चार्ट लिखेंगे। नहींथक जाते हैं। वास्तव में क्या करना हैरोज़ अपना मुँह आइने में देखना हैतो पता पड़ेगा कि हम लक्ष्मी को वा सीता को वरने लायक हैं वा प्रजा में चले जायेंगेपुरुषार्थ तीव्र कराने के लिए चार्ट लिखने को कहा जाता है और देख भी सकते हैं कि हमने कितना समय शिवबाबा को याद कियासारी दिनचर्या सामने आ जाती है। जैसे छोटेपन से लेकर सारे आयु की जीवन याद रहती है ना! तो क्या एक दिन का याद नहीं पड़ेगा। देखना है हम बाबा को और चक्र को कितना समय याद करते हैंऐसी प्रैक्टिस करने से रूद्र माला में पिरोने के लिए दौड़ी जल्द पहनेंगे। यह है योग की यात्राजिसको और कोई जानते नहीं तो सिखा कैसे सकते। तुम जानते हो अब बाबा के पास लौटना है। बाबा का वर्सा है ही राजाई इसलिए इस पर नाम पड़ा है राजयोग।

तुम सब राजऋषि हो। वह हैं हठयोग ऋषि। वह भी पवित्र रहते हैं। राजाई में तो राजा रानी प्रजा सब चाहिए। सन्यासियों में तो राजा रानी हैं नहीं। उन्हों का है हद का वैराग्यतुम्हारा है बेहद का वैराग्य। वह घरबार छोड़ फिर भी इस विकारी दुनिया में ही रहते हैं। तुम्हारे लिए तो इस दुनिया के बाद फिर है स्वर्गदैवी बगीचा। तो वही याद पड़ेगा। यह बात तुम बच्चे ही बुद्धि में रख सकते हो। बहुत हैं जो चार्ट लिख भी नहीं सकते। चलते-चलते थक पड़ते हैं। बाबा कहते हैं - बच्चे अपने पास नोट करो कि कितना समय मोस्ट बिलवेड बाबा को याद कियाजिस बाप की याद से ही वर्सा लेना है। जब राजाई का वर्सा लेना है तो प्रजा भी बनानी है। बाबा स्वर्ग का रचयिता है तो उनसे क्यों नहीं स्वर्ग का वर्सा मिलना चाहिए। बहुत हैं जिनको स्वर्ग का वर्सा मिलता है। बाकी को शान्ति मिलती है। बाप सभी को कहते हैं बच्चे देह सहित देह के सभी सम्बन्धों को भूलो। तुम अशरीरी आये थे, 84 जन्म भोगे अब फिर अशरीरी बनो। क्रिश्चियन धर्म वालों को भी कहेंगे तुम क्राइस्ट के पिछाड़ी आये हो। तुम भी बिगर शरीर आये थेयहाँ शरीर लेकर पार्ट बजायाअब तुम्हारा भी पार्ट पूरा होता है। कलियुग का अन्त आ गया है। अब तुम बाप को याद करो,मुक्तिधाम वाले सुनकर बहुत खुश होंगे। वह चाहते ही मुक्ति हैं। समझते हैं जीवनमुक्ति (सुख) पाकर फिर भी तो दु:ख में आयेंगे,इससे तो मुक्ति अच्छी। यह नहीं जानते कि सुख तो बहुत है। हम आत्मायें परमधाम में बाप के साथ रहने वाली हैं। परन्तु परमधाम को अब भूल गये हैं। कहते हैं बाप आकर सभी मैसेन्जर्स को भेजते हैं। वास्तव में कोई भेजता नहीं है। यह सब ड्रामा बना हुआ है। हम तो सारे ड्रामा को जान गये हैं। तुम बच्चों की बुद्धि में बाप और चक्र याद हैतो तुम चक्रवर्ती राजा अवश्य बनेंगे। मनुष्य तो समझते हैं यहाँ दु:ख बहुत है इसलिए मुक्ति चाहते हैं। यह दो अक्षर गति और सद्गति चले आते हैं। परन्तु इनका अर्थ कोई भी नहीं जानते। तुम बच्चे जानते हो सबका सद्गति दाता एक बाप ही हैबाकी सब पतित हैं। दुनिया ही सारी पतित है। इन अक्षरों पर भी कोई-कोई बिगड़ते हैं। बाप कहते हैं इस शरीर को भूल जाओ। तुमको अशरीरी भेजा था। अब भी अशरीरी होकर मेरे साथ चलना है। इसको नॉलेज अथवा शिक्षा कहा जाता है। इस शिक्षा से ही सद्गति होती है। योग से तुम एवरहेल्दी बनते हो। तुम सतयुग में बहुत सुखी थे। कोई चीज़ की कमी नहीं थी। दु:ख देने वाला कोई विकार नहीं था। मोहजीत राजा की कथा सुनाते हैं। बाबा कहते हैं मैं तुमको ऐसे कर्म सिखाता हूँजो तुमको कभी कर्म कूटने नहीं पड़ेंगे। वहाँ ऐसी ठण्डी भी नहीं होगी। अभी तो 5 तत्व भी तमोप्रधान हैं। कभी बहुत गर्मीकभी बहुत ठण्डी। वहाँ ऐसी आपदायें होती नहीं। सदैव बसन्त ऋतु रहती है। नेचर सतोप्रधान है। अभी नेचर तमोप्रधान है। तो अच्छे आदमी कैसे हो सकते। इतने बड़े-बड़े भारत के मालिक सन्यासियों के पीछे फिरते रहते हैं। उनके पास बच्चियां जाती हैं तो कहते हैं फुर्सत नहीं। इससे समझ जाते हैं कि इनकी तकदीर में स्वर्ग के सुख नहीं हैं। ब्राह्मण कुल के भाती बनते ही नहींइनको पता ही नहीं कि भगवान कैसे और कब यहाँ आते हैं! शिव जयन्ती मनाते हैं परन्तु शिव को सभी भगवान नहीं समझते हैं। अगर उनको परमपिता परमात्मा समझते तो शिव जयन्ती के दिन हालीडे मनाते। बाप कहते हैं मेरा जन्म भी भारत में होता है। मन्दिर भी यहाँ हैं। जरूर किसी शरीर में प्रवेश किया होगा। दिखाते हैं दक्ष प्रजापति ने यज्ञ रचा। तो क्या उसमें आया होगा! ऐसे भी नहीं कहते। कृष्ण तो होता ही है सतयुग में। बाप खुद कहते हैं मुझे ब्रह्मा मुख द्वारा ब्राह्मण वंशावली रचनी है। कोई को यह भी तुम समझा सकते होबाबा कितना सहज समझाते हैं सिर्फ याद करो। परन्तु माया इतनी प्रबल है जो याद करने नहीं देती। आधाकल्प की दुश्मन है। इस दुश्मन पर ही जीत पानी है। भक्ति मार्ग में मनुष्य ठण्डी में स्नान करने जाते हैं। कितने धक्के खाते हैं। दु:ख सहन करते हैं। यहाँ तो पाठशाला हैपढ़ना हैइसमें धक्के खाने की तो कोई बात ही नहीं। पाठशाला में ब्लाइन्ड फेथ की तो बात नहीं। मनुष्य तो बहुत ब्लाइन्ड फेथ में फंसे हुए हैं। कितने गुरू आदि करते हैं। परन्तु मनुष्य तो कभी मनुष्य की सद्गति कर नहीं सकते। जो भी मनुष्यों को गुरू बनाते हैंवह ब्लाइन्डफेथ हुआ ना। आजकल छोटे बच्चों को भी गुरू कराते हैं। नहीं तो कायदा है वानप्रस्थ में गुरू करने का। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिये मुख्य सार:-

1) तीव्र पुरुषार्थ के लिए याद का चार्ट जरूर रखना है। रोज़ आइने में अपना मुँह देखना है। चेक करना है - हम मोस्ट बिलवेड बाप को कितना समय याद करते हैं!

2) जो कुछ पढ़ा है वह भी भूल चुप रहना है। मुख से कुछ भी कहना नहीं है। बाप की याद से विकर्म विनाश करने हैं।
वरदान:-      ब्रह्मा बाप के कदम पर कदम रख हद को बेहद में समाने वाले बेहद के बादशाह भव
फालो फादर करना अर्थात् मेरे को तेरे में समानाहद को बेहद में समानाअभी इस कदम पर कदम रखने की आवश्यकता है। सबके संकल्पबोलसेवा की विधि बेहद की अनुभव हो। स्व-परिवर्तन के लिए हद को सर्व वंश सहित समाप्त करोजिसको भी देखो वा जो भी आपको देखे - बेहद के बादशाह का नशा अनुभव हो। सेवा भी होसेन्टर्स भी हों लेकिन हद का नाम निशान न हो तब विश्व के राज्य का तख्त प्राप्त होगा।
स्लोगन:-     अपने ख्यालात आलीशान बना लो तो छोटी-छोटी बातों में टाइम वेस्ट नहीं जायेगा।
पुरुषार्थी ..
पुरुष बन रथ को चलना .. 
पुरुषार्थी की जय ... पुरुषार्थी भव ...
पुरुषार्थी .. तीव्र पुरुषार्थी .. डबल पुरुषार्थी ... ट्रिपल तीव्र पुरुषार्थी .... फस्ट क्लास पुरुषार्थी ... नंबर वन पुरुषार्थी .... सफलता के पुरुषार्थी .... श्रीमत अनुसार पुरुषार्थी ... उत्तम पुरुषार्थी .... यथार्थ पुरुषार्थी .... अच्छा पुरुषार्थी ... पक्का पुरुषार्थी ... सच्चा पुरुषार्थी.... श्रेष्ठ पुरुषार्थी .... गुप्त पुरुषार्थी .... अथक पुरुषार्थी ... विशेष पुरुषार्थी .. कड़ा पुरुषार्थी  .. कायदे का पुरुषार्थी .. सर्वोत्तम पुरुषार्थी .. ज्वाला स्वरूप का पुरुषार्थ ... उमंग उत्साह से पुरुषार्थ .. हिम्मत वाला पुरुषार्थी .... 

मैं आत्मा दिन रात का कड़ा पुरुषाथ - गंभीर पुरुषार्थ - गहेरा पुरुषार्थ - पूरी प्राप्ति का पुरुषार्थ से पूर्ण हिसाब किताब चुक्तु करने वाला - पूर्ण संस्कारों को मिटाने वाला सम्पूर्ण प्राप्ति वाला प्रक्टिकलमूर्त हूँ -  


मैं आत्मा तीव्र पुरुषार्थ की लगन वाला ..  तीव्र पुरुषार्थ की प्रोमिश वाला  ... तीव्र पुरुषार्थ की द्रढ़ता वाला ...  सारे दिन की तीव्र पुरुषार्थ की प्रेक्टिकल में रिजल्ट देने वाला ...   तीव्र पुरुषार्थ की सौगात वाला ...  तीव्र पुरुषार्थ के वरदान से आगे ही बढ़ने वाला ... तीव्र पुरुषाथ की धारणा वाला  ...  तीव्र पुरुषार्थ की सेवा वाला  ... तीव्र पुरुषार्थी की अटेंशन वाला और तीव्र पुरुषार्थ की अथक वाला  ... तीव्र पुरुषार्थ करने और कराने वाला ...  तीव्र पुरुषार्थी का टाइटल वाला ...


 

संतुष्टता

संतुष्टता से प्राप्ति स्वरूप ... संतुष्टता से विजयी .... संतुष्टता से भरपूर .... 
संतुष्टता से भरपूर ... संतुष्टता से तुप्त .... संतुष्टता से व्यक्ति साथी प्रकुर्ती परिस्थिति परिवर्तन .... संतुष्टता से मायाप्रूफ .... विध्न प्रफु .... समस्या प्रूफ .... समाधान स्वरूप ... संतुष्टता का वायुमंडल वातावरण वायब्रेशन .... संतुष्टता का योगभोग ... संतुष्ट रहना .. संतुष्ट करना ... संतुष्टता का सर्टिफिकेट .... चमकती संतुष्टमनियां ... संतोषी ....

सफलता

सर्व खजानों को सफल करें कराने वाले सफलतास्वरूप ... सफलतामूर्त  ... सफलता  का सितारा ... सफलता का अधिकार .. सफलता की माला ... सफलता का सर्टिफिकेट .. सफलता सम्पन ... सफलता सम्पूर्ण ... सफलता मन बिंदी स्वरूप .. सफलता माना लक्ष्मी नारायण ....

विजय

विजय मेरा नाम है .... विजय मेरे जीवन का सहारा है ... विजयी का विजयी स्वरूप हूँ .. विजयी रत्न हूँ ... विजय मेरे गले का हार है ... विजयी मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है ... कल्प कल्प की अनेक बार की विजयी आत्मा हूँ ... विजयी थे .. विजयी है ... विजयी हुई ही पड़ी है .. 
विजयी माना विश्वमहाराजन 

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