नैतिक शिक्षा से ही चरित्र का निर्माण: भगवान भाई
हिन्दुस्तान टीम, सीतामढ़ी
- Last updated: Sat, 14 Apr 2018 01:07 AM IST
प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के तत्वावधान नगर के दो विद्यालय में आयोजित नैतिक शिक्षा के महत्व विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माउंट आबू राजसीन से आये राजयोगी भगवान भाई ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता है। नैतिक शिक्षा से हीं चरित्र का निर्माण होता है। इसके अभाव में सर्वांगीण विकास असंभव है।
नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की शिक्षा प्राथमिक विद्यालय से ही प्ररंभ होना चाहिए तथा समय समय पर उसका मूल्यांकन किया जाना चाहिए। शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्रवान और गुणवान बनाना है। इसके अभाव में ही राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय और पारिवारिक व्यक्तिगत समस्याएं उत्पन्न हो रही है। उन्होंने कहा कि अंधकार से प्रकाश की ओर असत्य से सत्य की ओर बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाना ही सच्ची शिक्षा और सच्चा ज्ञान है। शिक्षकों को सबसे अधिक इस महत्व को समझने तथा इसके अनुकूल शिक्षा देने की जरूरत है। इसी से नम्रता ईमानदारी, सत्यता, सहनशीलता और शांति का गुण विकसित होता है और वह सफल इंसान बनता है। स्थानीय सेवाकेन्द्र की संचालिका बीके वंदना बहन ने कहा कि नैतिक मूल्यों का श्रोत अध्यात्मिकता है। अध्यात्मिक ज्ञान के आचरण से नैतिक व्यवहार में दिखाई देंगे। कार्यक्रम को प्रधानाचार्या अंजू कुमारी, प्राचार्या मनोरमा ने संस्था के प्रति आभार प्रकट किया। मौके पर बीके ब्रह्मदेव भाई, बीके रविन्द्र भाई व बीके राजनारायण भाई आदि मौजूद थे।
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