Saturday, 14 April 2018

BRAHMAKUMARI , SITAMARHI , MUZAFFARPUR , BIHAR नैतिक शिक्षा सीतामढ़ी (बिहार )

सीतामढ़ी (बिहार )---हेलेन्स स्कूल में नैतिक शिक्षा  का पाठ पढ़ाया 
आयोजक–स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र सीतामढ़ी (बिहार )---
मुख्य वक्ता ---ब्रह्माकुमार भगवान् भाई माउंट आबू 
विषय-- नैतिक शिक्षा का महत्व 
उप प्राचार्य ---श्री गणेश कुमार झा
बी के वंदना  बहन प्रभारी सीतामढ़ी (बिहार )
बी के ब्रह्मदेव भाई ,रामकेश्वेर भाई रविंदर भाई ,प्रभात भाई  , बी के निशा बहन , बी के शोभा बहन , गगनदेव  भाई भी उपस्थित थे     
सभी शिक्षक स्टाफ भी उपस्थित थे  
भगवान भाई ने कहा कि नैतिक मूल्यों से बच्चे के सुंदर चरित्र का निर्माण होता है |
नैतिक मूल्यों के विकास से बच्चे में समाजीकरण की भावना का विकास होता है |गुणवान व्यक्ति देश की सम्पति हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियोंं के सर्वांगिण विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक शिक्षा की भी आवश्यकता हैँ। चरित्र निर्माण ही शिक्षा का मूल उद्देश्य होता हैं।
उन्होंने कहा कि भोतिक शिक्षा  भौतिकता की ओर धकेल रही भौतिक शिक्षा की बजाय इंसान को नैतिक शिक्षा की आवश्यकता हैं।नैतिक शिक्षा से नैतिकता आएगी | उन्होंने कहा नैतिक मूल्यों की कमी ही समाज के  हर समस्या का मूल कारण हैं। इसलिए विद्यार्थियों को नैतिक मूल्यों एवं उच्च आदर्शों से बच्चे का आत्मविश्वास व आत्मचेतना मजबूत होती है | उसके अंदर सच्चाई का बोलबाला होता है | उसमे समस्या के समाधान के लिए सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता होती है |
उन्होंने कहा कि जब तक हमारे व्यवहारिक जीवन में परोपकार,सेवाभाव,त्याग,उदारता,पवित्रता,सहनशीलता,नम्रता,धैर्यता,सत्यता,ईमानदारी, आदि सद्गुण नहीं आते। तब तक हमारी शिक्षा अधूरी हैं। उन्होंने कहा कि समाज अमूर्त होता हैं और प्रेम,सद्भावना,भातृत्व,नैतिकता एवं मानवीय सद्गुणों से सचालित होता हैं।
भगवान भाई ने कहा कि हमें अपने दृष्टिकोण को सकारात्मक बनाने के लिए ज्ञान की आवश्यकता हैं। दृष्टिकोण सकारात्मक रहने पर मनुष्य हर परिस्थिति में सुखी रह सकता हैं। उन्होंने व्यसनों से दूर रहने पर भी जोर दिया। 
  बी के वंदना बहन ने ब्रह्माकुमारी सस्था का परिचय दिया 
उप प्राचार्य श्री गणेश कुमार झा ने भी अपना उद्भोधन दिया कहा कि अंधकार से प्रकाश की ओर असत्य से सत्य की ओर बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाना ही सच्ची शिक्षा और सच्चा ज्ञान है। इसी से नम्रता ईमानदारी, सत्यता, सहनशीलता और शांति का गुण विकसित होता है और वह सफल इंसान बनता है
कार्यक्रम के अंत में मेडिटेशन कराया 











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