Wednesday, 4 April 2018

नैतिक शिक्षा का महत्व --ब्रह्मकुमार भगवान् भाई ब्रह्माकुमारी माउंट आबू




























प्रतापगढ़ (राजस्थान )—निराश्रित बालगृह  में नैतिक शिक्षा का महत्व विषय पर प्रोग्राम     
आयोजक –स्थानीय ब्रह्माकुमारी  सेवाकेंद्र प्रतापगढ़ (राजस्थान )
मुख्य वक्ता ---ब्रह्मकुमार भगवान् भाई माउंट आबू
विषय –-नैतिक शिक्षा का महत्व  
व्यवस्थापक ---श्री रामगोपाल टेलर 
बी के मीना बहन जी स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेंटर प्रभारी  प्रतापगढ़ (राजस्थान )
जिला परिवहन अधिकारी  ---प्रमोद लोढ़ा  
कार्यक्रम के अंत में राजयोग का अभ्यास कराया गया 
माउंट आबू से आये हुए बी के भगवान् भाई ने कहा बच्चो  के विकास के लिए भौतिक शिक्षा के साथ नैतिक शिक्षा भी जरूरी है। हर मनुष्य को जीवन मूल्यों की रक्षा करना चाहिए। इन मूल्यों की रक्षा करने वाला अमर बन जाता है।उन्होंने बताया की अपने आप को अब निराश्रित नही समझना है हम अभी आत्माये है हम सभी का पिता परमपिता ज्योतिबिंदु परमात्मा है सदा उनके स्मुर्ती में रहने से मनोबल बढ़ता है 
उन्होंने कहा कि छात्राओं के लिए जितना जरूरी किताबी ज्ञान है, उतना ही जरूरी नैतिक मूल्यों को जीवन में धारण करने की प्रेरणा देना है। नैतिक मूल्यों की कमी व्यक्तिगत, सामाजिक, पारिवारिक, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सर्व समस्याओं का मूल कारण है। अत: शैक्षणिक संस्थाओं में पढ़ाई के साथ ब'चों का मूल्यांकन, आचरण, अनुसरण, व्यावहारिक ज्ञान, लेखन एवं अन्य बातों की तरफ प्रेरणा देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षा ब'चों को अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, बंधनों से मुक्ति की ओर ले जाए वही वास्तविक शिक्षा है। अपराध मुक्त समाज की स्थापना के लिए मानवीय मूल्यों, नैतिक मूल्यों, नैतिक शिक्षा एवं आध्यात्मिक शिक्षा के द्वारा वर्तमान के युवाओं को सशक्त व संस्कारित करना जरूरी है। आज का युवा कल का भावी समाज है। वर्तमान का सशक्त युवा भविष्य के समाज को सशक्त बना सकता है। वर्तमान समय कुसंग, सिनेमा, व्यसन और फैशन से युवा पीढ़ी भटक रही है। आध्यात्मिक ज्ञान और नैतिक शिक्षा के द्वारा युवा पीढ़ी को नई दिशा मिल सकती है। उन्होंने बताया कि सिनेमा, इन्टरनेट व टीवी के माध्यम से युवा पीढ़ी को बचाने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी को कुछ रचनात्मक कार्य सिखाएं तब उनकी शक्ति सही उपयोग में ला सकेंगे।
बी के मीना बहन जी   जी ने भी अपना उद्बोधन भी दिया 
अंत में मेडिटेशन भी किया 
  व्यवस्थापक ---श्री रामगोपाल टेलर ने कहा की  शिक्षा मनुष्य के सम्यक् विकास के लिए उसके विभिन्न ज्ञान तंतुओ को प्रशिक्षित करने की प्रक्रिया है। इसके द्वारा लोगों में आत्मसात करने, ग्रहण करने, रचनात्मक कार्य करने, दूसरों की सहायता करने और राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में पूर्ण सहयोग देने की भावना का विकास होता है। इसका उद्देश्य व्यक्ति को परिपक्व बनाना है ।
जिला परिवहन अधिकारी  ---प्रमोद लोढ़ा   जी ने ब्रह्मकुमार भगवान् भाई का परिचय दिया 


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